2026-05-14 00:43:08
नई दिल्ली / भव्य खबर । रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ केंद्र में आयोजित होने वाले ‘कलम और कवच 3.0’ सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन देश के रक्षा और सामरिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जहां वरिष्ठ नीति-निर्माता, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि, राजनयिक, स्टार्ट-अप, नवाचार विशेषज्ञ, शिक्षाविद और सामरिक विश्लेषक भारत के बदलते रक्षा परिदृश्य और भविष्य की युद्ध तैयारियों पर व्यापक चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का मुख्य फोकस जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (JAI) के रणनीतिक विज़न के साथ-साथ स्वदेशीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (I²) को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप एकीकृत सैन्य क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और सामरिक साझेदारियों को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में उच्च स्तरीय सामरिक सत्र, मुख्य संबोधन, अनौपचारिक संवाद और रक्षा उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ चर्चा आयोजित की जाएगी। सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफअनिल चौहान , नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी , रक्षा मंत्रालय, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय, डीआरडीओ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के वरिष्ठ अधिकारी, विदेशी राजदूत, मित्र देशों के रक्षा अताशे, वैश्विक रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि, भारतीय उद्योग जगत के नेता, एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स और प्रमुख सामरिक थिंक टैंक शामिल होंगे।
उद्घाटन सत्र में चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) एवं चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल Ashutosh Dixit विशेष संबोधन देंगे। सम्मेलन में भविष्य की युद्ध क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित युद्ध प्रणाली, ऑटोनॉमस सिस्टम, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम-सक्षम C4ISR क्षमताओं, स्पेस एवं लो-अर्थ ऑर्बिट खतरों और ट्राई-सर्विस इंटीग्रेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा सम्मेलन में सामरिक वैश्विक साझेदारी, सह-विकास मॉडल, उन्नत रक्षा उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ढांचे पर भी विचार-विमर्श होगा। ‘कलम और कवच 3.0’ का विशेष उद्देश्य रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को तेज़ी देना, MSMEs और iDEX आधारित नवाचारों को बढ़ावा देना, रक्षा औद्योगिक गलियारों को मजबूत करना तथा विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के अनुरूप स्वदेशी निर्माण क्षमताओं का विस्तार करना है।
सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि भरोसेमंद वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत के रक्षा-औद्योगिक ढांचे को कैसे और मजबूत किया जा सकता है, ताकि स्वदेशी क्षमता विकास को नई गति मिल सके और भारत वैश्विक रक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सके।