2026-04-28 12:24:05
ओडिशा / भव्य खबर । ओडिशा के क्योंझर जिले से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। सोमवार को एक आदिवासी युवक ने अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक पहुंचकर विरोध जताया, जिससे वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।
यह मामला क्योंझर जिले के मल्लिप्सी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक शाखा का है। यहां दियानाली गांव निवासी जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही वह बैंक परिसर में पहुंचा और कंकाल को बरामदे में रखा, वहां मौजूद कर्मचारी और ग्राहक स्तब्ध रह गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बैंक कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
जानकारी के अनुसार, जीतू मुंडा पिछले कई दिनों से अपनी बहन के खाते से ₹20,000 निकालने के लिए बैंक के चक्कर काट रहा था। उसने बैंक कर्मचारियों को बार-बार बताया कि उसकी बहन का निधन हो चुका है, लेकिन कथित तौर पर उससे खाता धारक को व्यक्तिगत रूप से लाने के लिए कहा गया। आवश्यक प्रक्रियाओं और नियमों की स्पष्ट जानकारी न मिलने के कारण वह लगातार परेशान और निराश होता जा रहा था।
हताशा में आकर जीतू ने अपनी बहन के दफनाए गए शव को कब्र से बाहर निकाला और करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर कंकाल को कंधे पर रखकर बैंक पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने इसे विरोध स्वरूप रख दिया। यह दृश्य इतना असामान्य था कि हर कोई दंग रह गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जीतू मुंडा अशिक्षित है और आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखता है, जिसके कारण उसे बैंकिंग और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी। थाना प्रभारी निरीक्षक किरण प्रसाद साहू ने बताया कि उसे ‘कानूनी वारिस’ या ‘नॉमिनी’ जैसी अवधारणाओं की समझ नहीं थी, और बैंक की ओर से भी उसे पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिला।
बताया गया कि कलारा मुंडा का निधन 26 जनवरी 2026 को हुआ था। उनके बैंक खाते में दर्ज नामांकित व्यक्ति—पति और पुत्र—दोनों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में जीतू ही एकमात्र जीवित दावेदार है। उसकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, और बहन के खाते में जमा राशि उसके लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण सहारा थी।
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। अधिकारियों ने जीतू को आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी और आश्वासन दिया कि नियमों के अनुसार उसे सहायता प्रदान की जाएगी। बाद में कंकाल को वापस ले जाकर पुलिस की मौजूदगी में पुनः दफना दिया गया।
इस मामले पर क्योंझर के उप कलेक्टर उमा शंकर दलई ने कहा कि युवक को प्रक्रियात्मक जानकारी नहीं थी और उसने हताशा में यह कदम उठाया। प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि वह अपनी बहन का प्रथम श्रेणी का कानूनी वारिस नहीं है, इसलिए बैंक ने उससे आवश्यक दस्तावेज मांगे थे, जो वह प्रस्तुत नहीं कर सका। उन्होंने बताया कि अब उसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी वारिस प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया तेज की जा रही है। साथ ही रेड क्रॉस की ओर से ₹20,000 की सहायता राशि भी दिलाई जा रही है।
यह घटना न केवल सिस्टम की जटिलताओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जागरूकता और सही मार्गदर्शन की कमी किस तरह एक व्यक्ति को इस हद तक मजबूर कर सकती है।