आत्मनिर्भर भारत को बड़ी ताकत, DRDO ने स्वदेशी प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ULPGMV3 का सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) से दागी जाने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 के अंतिम कॉन्फ़िगरेशन विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
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2026-05-19 23:10:16

आंध्र प्रदेश / भव्य खबर । भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) से दागी जाने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 के अंतिम कॉन्फ़िगरेशन विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित डीआरडीओ परीक्षण रेंज में एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर दोनों मोड में किए गए।

डीआरडीओ के अनुसार परीक्षण एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (जीसीएस) के माध्यम से किए गए, जो मिसाइल प्रणाली के कमांड और कंट्रोल के साथ-साथ लॉन्च और ऑपरेशन की प्रक्रियाओं को स्वचालित रूप से संचालित करता है।

इस परियोजना के तहत डीआरडीओ ने मिसाइल निर्माण और उत्पादन के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, हैदराबाद और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, हैदराबाद के साथ साझेदारी की है। वहीं परीक्षणों के दौरान इस मिसाइल प्रणाली को बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित यूएवी पर एकीकृत किया गया।

ULPGM-V3 मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने नोडल लैब के रूप में किया है। इसके साथ डीआरडीओ की अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं—डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) हैदराबाद, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) चंडीगढ़ और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल) पुणे—ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डीआरडीओ ने बताया कि यह मिसाइल पूरी तरह भारतीय रक्षा उत्पादन तंत्र के माध्यम से विकसित की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में एमएसएमई और घरेलू उद्योगों की भागीदारी रही। परीक्षणों ने यह भी साबित किया कि देश में अब इतनी मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार हो चुकी है कि इस मिसाइल का बड़े पैमाने पर उत्पादन तुरंत शुरू किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ, सार्वजनिक उपक्रमों, रक्षा उत्पादन साझेदारों और उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एयर-टू-ग्राउंड मोड में एंटी-टैंक भूमिका तथा एयर-टू-एयर मोड में ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम यह मिसाइल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है।

वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने भी परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं।

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