2026-05-12 00:15:55
नई दिल्ली / भव्य खबर । पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनज़र रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को कर्तव्य भवन-2 में अनौपचारिक मंत्री समूह यानी आईजीओएम की पांचवीं बैठक हुई। बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है, घरेलू मोर्चे पर सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है और जनता को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
बैठक में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रेल, सूचना प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए।
ईंधन के मोर्चे पर देश की स्थिति मज़बूत
बैठक में मंत्रियों को बताया गया कि भारत के पास इस समय 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का रसोई गैस यानी एलपीजी का रोलिंग स्टॉक मौजूद है। विदेशी मुद्रा भंडार भी आरामदायक स्थिति में 703 अरब डॉलर पर है। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश अपने यहां घरेलू खपत में नाटकीय कटौती करने के लिए आपातकालीन कदम उठाने को मजबूर हैं।
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल शोधक देश है और 150 से अधिक देशों को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करते हुए चौथे सबसे बड़े निर्यातक का दर्जा रखता है। संकट के 70 दिन से अधिक गुज़र जाने के बावजूद भारत उन गिने-चुने देशों में है जहां पेट्रोलियम के दाम स्थिर बने हुए हैं, जबकि कई देशों में क़ीमतें 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
हालांकि इस स्थिरता की क़ीमत भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने उठाई है। बैठक में बताया गया कि कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुक़सान सोख रही हैं और वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में अंडर-रिकवरी का आंकड़ा क़रीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की ख़गोलीय क़ीमतों का बोझ आम भारतीय नागरिक पर नहीं डाला गया है।
प्रधानमंत्री की अपील पर सरकारी अमल
बैठक में 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील पर अमल की रूपरेखा तय की गई जिसमें उन्होंने जनता से सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा था कि वे पेट्रोल और डीज़ल की खपत घटाने के लिए मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, कार पूलिंग को बढ़ावा दें, गैर-ज़रूरी विदेश यात्राओं से बचें, घरेलू पर्यटन और देश में ही आयोजनों को प्राथमिकता दें तथा एक साल तक ग़ैर-ज़रूरी सोने की खरीद टालें ताकि विदेशी मुद्रा भंडार संरक्षित रहे।
किसानों से उनकी अपील रही कि वे रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल आधा घटाएं, प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें और डीज़ल पंपों के बजाय सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप अपनाएं। राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मंत्रालय और राज्य मिलकर ईंधन-दक्षता, सार्वजनिक जागरूकता और ज़िम्मेदार उपभोग व्यवहार को संस्थागत रूप देने वाले उपायों की पहचान करें।
उद्योग और एमएसएमई के लिए राहत पैकेज
मंत्री समूह को उद्योग जगत, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई की मदद के लिए हाल में लिए गए नीतिगत फ़ैसलों की भी जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को आपातकालीन ऋण गारंटी योजना यानी ईसीएलजीएस 5.0 को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत 2 लाख 55 हज़ार करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह तय किया गया है। इसमें एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई तथा विमानन क्षेत्र के लिए 90 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवरेज दी जाएगी।
इसके अलावा सार्वजनिक खरीद अनुबंधों में फ़ोर्स मेज्योर जैसे जोखिमों पर उद्योग की चिंता को देखते हुए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा संकट को फ़ोर्स मेज्योर के लिए युद्ध-समान स्थिति माना जाएगा, और इसी आधार पर अनुबंधों की समय-सीमा 28 फ़रवरी 2026 से दो से चार महीने तक बढ़ाई जा सकेगी।
उर्वरक भंडार पिछले साल से कहीं बेहतर
खरीफ़ 2026 की चिंता के बीच बैठक में सबसे राहत भरी ख़बर उर्वरक मोर्चे से आई। 11 मई 2026 की स्थिति के मुताबिक देश में उर्वरकों का कुल भंडार 199.65 लाख टन है, जो पिछले साल इसी तारीख़ के 178.58 लाख टन के मुक़ाबले 21 लाख टन से अधिक है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूरिया का स्टॉक 76.65 लाख टन (पिछले साल 75.48), डीएपी का 22.52 लाख टन (पिछले साल 14.87 के मुक़ाबले लगभग डेढ़ गुना), एनपीके का 60.42 लाख टन (पिछले साल 48.32), एसएसपी का 26.99 लाख टन और एमओपी का 13.07 लाख टन हो चुका है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ़ 2026 के लिए कुल 390.54 लाख टन उर्वरक की ज़रूरत का आकलन किया है, जिसके मुक़ाबले आज ही 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक उपलब्ध है, जबकि सामान्य स्थिति में यह स्तर 33 प्रतिशत के आसपास रहता है। सरकार के मुताबिक यह बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का नतीजा है।
हालांकि उत्पादन के मोर्चे पर संकट का असर साफ़ दिखाई दे रहा है। 1 मार्च से 10 मई 2026 के बीच घरेलू उत्पादन 76.78 लाख टन रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के 92.01 लाख टन से क़रीब 15 लाख टन कम है। यूरिया का घरेलू उत्पादन 54.98 से घटकर 46.28 लाख टन और एनपीके का 22.03 से घटकर 15.57 लाख टन पर आ गया है। दूसरी ओर इस अवधि में बिक्री बढ़ी है, कुल बिक्री 59.65 लाख टन से बढ़कर 71.19 लाख टन हो गई है, यानी मांग में 19 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति बताती है कि भले ही भंडार ज़्यादा हो, पर उत्पादन में गिरावट और बिक्री में तेज़ी आगे चलकर दबाव बढ़ा सकती है।
रणनीतिक सोच की ज़रूरत पर ज़ोर
बैठक में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की मौजूदा प्राथमिकता ऊर्जा प्रवाह को बाधित न होने देना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे रणनीतिक संकट की पूर्व-आशंका, अर्ली वार्निंग असेसमेंट, परिदृश्य-योजना और पूरे शासन-तंत्र की समय पर तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया के घटनाक्रम को अलग-थलग नज़र से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि आज के परस्पर जुड़े वैश्विक माहौल में कोई भी अंतरराष्ट्रीय संकट प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सभी देशों को प्रभावित करता है। उन्होंने ऊर्जा-मिश्रण को बदलने, अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार, अधिक भरोसेमंद और विविधीकृत आपूर्ति स्रोतों की पहचान तथा ऊर्जा दक्षता तकनीकों में निवेश तेज़ करने का आह्वान भी किया। साथ ही उन्होंने रणनीतिक रिज़र्व की ज़रूरतों के पुनर्मूल्यांकन की बात भी कही ताकि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के बाद ‘एक्स’ पर पोस्ट में राजनाथ सिंह ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की घबराहट से बचने की अपील की, और भरोसा दिलाया कि सरकार आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट या किल्लत रोकने के लिए ज़रूरी हर ठोस क़दम उठा रही है।