2026-04-29 16:51:48
नई दिल्ली / भव्य खबर। दिल्ली में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान में तेज़ बढ़ोतरी के बीच आम जनजीवन के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ऐसे हालात में दिल्ली नगर निगम (NDMC) ने एक सराहनीय पहल शुरू की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
पक्षियों के लिए खास पहल
एनडीएमसी की उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने कार्यालय परिसरों में मिट्टी के पानी के पात्र (earthen water bowls) रखवाने की शुरुआत की है, ताकि गर्मी के इस मौसम में पक्षियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े और उन्हें राहत मिल सके।
उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के बीच जहां शहर में कई जगहों पर वाटर बूथ और कूलर लगाए गए हैं, वहीं यह भी जरूरी है कि प्रकृति और जीव-जंतुओं का भी ध्यान रखा जाए। एनडीएमसी क्षेत्र पहले से ही काफी हरा-भरा है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र हरियाली से आच्छादित है और बड़ी संख्या में पक्षी भी पाए जाते हैं।
‘स्वदेशी’ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कुलजीत चहल ने कहा कि यह पहल न केवल पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए है, बल्कि इसमें स्वदेशी भावना भी जुड़ी हुई है। जो मिट्टी के पात्र लगाए जा रहे हैं, वे स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए हैं। इससे एक ओर स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।
उन्होंने कहा कि यदि इन पात्रों में पानी रखा जाएगा, तो गर्मी के कारण पक्षियों को होने वाली परेशानियों में काफी कमी आएगी।
लोगों से भी की अपील
एनडीएमसी उपाध्यक्ष ने लोगों से अपील की कि वे भी इस पहल से जुड़ें और अपने घरों, बालकनी और छतों पर पक्षियों के लिए पानी रखें। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े बदलाव ला सकती हैं, खासकर तब जब गर्मी अपने चरम पर हो।
दिल्ली में हीटवेव का असर
वर्तमान में दिल्ली में भीषण हीटवेव की स्थिति बनी हुई है, जिससे दिन के समय तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान ने आम लोगों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।
ऐसे समय में एनडीएमसी की यह पहल न केवल मानवीय संवेदना को दर्शाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी का भी एक सकारात्मक उदाहरण पेश करती है।
दिल्ली में बढ़ती गर्मी के बीच एनडीएमसी की यह पहल एक प्रेरणादायक कदम है, जो यह संदेश देती है कि प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी मानव जीवन की। यदि समाज के हर वर्ग द्वारा ऐसे प्रयास किए जाएं, तो हीटवेव के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।