2026-05-06 17:11:31
नई दिल्ली / भव्य खबर । भीषण गर्मी के मौसम में राजधानी में आग लगने की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए एक व्यापक अग्निशमन योजना (Comprehensive Fire Safety Plan) तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्य, आंकड़े और विवरण 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत किए जाएं, ताकि योजना को जल्द से जल्द ज़मीन पर उतारा जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार आग से बचाव और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू करेगी, जिसमें आम नागरिकों, RWAs, बाजार संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों को शामिल किया जाएगा।
आंकड़े जो डराते हैं: गर्मी आते ही दिल्ली बन जाती है आग का शहर
दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के आंकड़े बताते हैं कि गर्मी का मौसम राजधानी के लिए कितना खतरनाक साबित होता है:
2026 के पहले चार महीनों में ही दिल्ली में 7,800 से ज़्यादा आग की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से अकेले अप्रैल में 2,300 से अधिक मामले सामने आए — यानी पूरे चार महीनों का लगभग 30%। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा करीब 20% अधिक है, क्योंकि 2025 में इसी अवधि में 6,511 कॉल आई थीं।
अप्रैल में दिल्ली अग्निशमन सेवा को रोज़ाना औसतन 120 कॉल मिल रही हैं, जबकि पिछले महीनों में यह संख्या 70 से 80 के बीच थी। यह आंकड़ा अपने आप में चिंताजनक है।
2024 की गर्मियों में अप्रैल से जून के बीच आग की कॉल्स 9,000 से ज़्यादा हो गई थीं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी थीं। इस अवधि में आग से होने वाली मौतें भी तीन गुना बढ़कर मात्र 10 से बहुत आगे निकल गईं। पूरे 2024 में दिल्ली में 113 लोगों की जान आग की घटनाओं में गई, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 70 रह गई।
क्यों बढ़ती हैं गर्मी में आग की घटनाएं?
विशेषज्ञों और दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों के अनुसार गर्मी में आग के खतरे की कई वजहें हैं:
1. इलेक्ट्रिकल लोड में भारी बढ़ोतरी — तापमान बढ़ने से AC और अन्य बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल लगातार बढ़ता है। इससे वायरिंग गर्म हो जाती है, ट्रांसफॉर्मर दबाव में आते हैं, और शॉर्ट सर्किट तथा आग की घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
2. इलेक्ट्रिकल फेल्योर मुख्य कारण — अधिकारियों के मुताबिक राजधानी में गर्मी के दौरान लगने वाली लगभग तीन-चौथाई आग की घटनाओं के पीछे इलेक्ट्रिकल फेल्योर ज़िम्मेदार होता है।
3. सूखा मौसम और दहनशीलता — तेज़ गर्मी और हवा में नमी की कमी से सामग्री बहुत जल्दी आग पकड़ लेती है। दिल्ली के पुराने इलाकों — जहां तंग गलियों में दुकानें, घर और बेतरतीब बिजली के तार एक-दूसरे से उलझे रहते हैं — वहां आग फैलने की रफ्तार और भी ज़्यादा होती है।
4. कूड़ा जलाने की घटनाएं — अप्रैल 2025 में जो 2,991 कॉल्स आईं, उनमें से 1,030 यानी 34.4% सिर्फ कूड़ा जलाने की घटनाओं की थीं।
जान-माल का खतरा: आम नागरिक से लेकर फायरकर्मियों तक
पिछले 32 साल से दिल्ली अग्निशमन सेवा में काम कर रहे एक वरिष्ठ फायर ऑफिसर का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतनी आग की घटनाओं का सामना नहीं किया जितना हाल के सालों की गर्मियों में करना पड़ा है। 50 डिग्री के करीब पहुंचता तापमान, सूखी हवा, और बिजली का बेतहाशा लोड — यह तिकड़ी आग को विकराल रूप दे देती है।
झुग्गी-झोपड़ी इलाकों, पुराने बाजारों, टेक्सटाइल मार्केट, स्क्रैपयार्ड, और LPG से जुड़े छोटे प्रतिष्ठानों में आग लगने पर अक्सर परिवार के परिवार सब कुछ खो देते हैं। हाल ही में DFS ने अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट के तत्काल आदेश दिए हैं, और रिहायशी इलाकों में चलने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बड़े पैमाने पर ऑडिट के लिए एजेंसियों को empanel करने का काम शुरू किया गया है।
CM रेखा गुप्ता का प्लान: रोकथाम + जागरूकता + तेज़ प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रस्तावित योजना तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगी —
पहला, रोकथाम (Prevention) — पुराने वायरिंग सिस्टम का ऑडिट, ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाना, फायर हाइड्रेंट्स की मरम्मत और भीड़भाड़ वाले बाजारों में नियमित निरीक्षण।
दूसरा, जागरूकता अभियान — स्कूलों, RWAs, बाजार समितियों, और सोशल मीडिया के ज़रिए आम लोगों को आग से बचाव की बुनियादी जानकारी देना — जैसे ओवरलोडिंग न करना, खराब वायरिंग को समय पर बदलना, सिलेंडर की सही देखभाल, और कूड़ा न जलाना।
तीसरा, तेज़ प्रतिक्रिया (Rapid Response) — दिल्ली अग्निशमन सेवा को आधुनिक उपकरण, अतिरिक्त मैनपावर, और तंग गलियों के लिए छोटे फायर-टेंडर मुहैया कराना।
क्या होगा आगे?
10 दिन के भीतर सभी विभाग अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में जमा करेंगे, जिसके बाद इस व्यापक योजना का अंतिम खाका तैयार किया जाएगा। इसमें DFS, बिजली वितरण कंपनियां, MCD, PWD, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय — सबकी भूमिका तय की जाएगी।
दिल्ली के नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने हालात की गंभीरता को समय रहते पहचाना है। अगर यह योजना ज़मीन पर ठीक से उतरी, तो आने वाली गर्मियां शायद उतनी डरावनी न हों जितनी पिछले कुछ सालों में रही हैं। मगर सवाल यह ज़रूर है की क्या यह तयारी गर्मी शुरू होने से पहले नहीं होनी चाहिए थी, क्या अब इतनी जल्दी रोकथाम, जागरूकता अभियान, तेज़ प्रतिक्रिया जमीनी स्तर पर इस मौसम में संभव होगा इम्प्लीमेंट करना।