2026-05-18 15:56:59
नई दिल्ली / भव्य खबर । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 से 21 मई तक वियतनाम और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ रणनीतिक सैन्य सहयोग को मजबूत करना, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को विस्तार देना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।
रवाना होने से पहले सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में रक्षा मंत्री ने कहा कि वह दोनों एशियाई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के दायरे को और व्यापक बनाने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामरिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
रक्षा मंत्री का वियतनाम दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया गया था। दौरे के दौरान राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने के लिए वर्ष 2022 में “इंडिया-वियतनाम डिफेंस पार्टनरशिप टुवर्ड्स 2030” संयुक्त विजन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति और समृद्धि को लेकर साझा प्रतिबद्धता जताई थी।
वियतनाम यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर हो ची मिन्ह समाधि स्थल जाकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।
इसके बाद रक्षा मंत्री दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जहां वह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आन ग्यु-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा की जाएगी और नए सहयोगी क्षेत्रों पर चर्चा होगी। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया में डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन (DAPA) के प्रमुख ली योंग-चियोल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करेंगे।
दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान भारतीय सैनिकों के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया जाएगा। कोरियाई युद्ध के दौरान भारत ने वैश्विक शांति और मानवीय सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट ने तीन वर्षों तक सेवा देते हुए दो लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया था और करीब 2,500 सर्जरी की थीं। भारत ने युद्धबंदियों की सुरक्षित वापसी में भी अहम भूमिका निभाई थी।
शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए 21 मई को भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया के पेट्रियट्स एंड वेटरंस अफेयर्स मंत्री क्वोन ओह-यूल भी शामिल होंगे।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ के बीच बढ़ते सामंजस्य को दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्री का यह दौरा एशिया में भारत की सामरिक और कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा।