2026-05-20 23:48:21
दक्षिण कोरिया / भव्य खबर । भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सियोल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा करते हुए रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, सैन्य आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीतिक सोच के बीच बढ़ते सामंजस्य को भी स्वीकार किया गया।
रक्षा साइबर, प्रशिक्षण और यूएन पीसकीपिंग में हुए समझौते
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें रक्षा साइबर सहयोग, भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच प्रशिक्षण सहयोग तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग से जुड़े समझौते शामिल हैं।
इन समझौतों को दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को बहुआयामी और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
संयुक्त विकास और रक्षा उत्पादन पर जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के नए अवसरों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक में भारत-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम (KIND-X) के रोडमैप पर भी चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ना है।
भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग राउंडटेबल का आयोजन
अपने दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता भी की। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और प्रमुख रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में रक्षा निर्माण, सह-विकास, सह-उत्पादन और सप्लाई चेन साझेदारी के नए अवसरों पर चर्चा की गई।
राउंडटेबल को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे रक्षा औद्योगिक ढांचे और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उपलब्ध अवसरों का उल्लेख किया। उन्होंने दक्षिण कोरियाई कंपनियों से भारतीय उद्योगों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विशाल निर्माण क्षमता, प्रतिभा और इनोवेशन मिलकर भविष्य की रक्षा तकनीकों के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकती हैं।
आधुनिक युद्ध तकनीकों में सहयोग की अपार संभावनाएं
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल और स्पेस-बेस्ड सिस्टम जैसे क्षेत्र रक्षा क्षेत्र की नई ताकत बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप्स, एमएसएमई, निजी उद्योग, शोध संस्थान और सार्वजनिक उपक्रम मिलकर एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं। भारतीय युवा उद्यमी ड्रोन, एआई प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा और एडवांस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहे हैं।
एलएंडटी और हनवा कंपनी के बीच हुए समझौते
कार्यक्रम के दौरान भारत की लार्सन एंड टुब्रो और दक्षिण कोरिया की हनवा कंपनी लिमिटेड के बीच दो अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले- दुनिया अब भारत की बात सुनती है
दक्षिण कोरिया में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि “12-13 साल पहले भारत को एक कमजोर देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज दुनिया भारत की बात ध्यान से सुनती है। भारत अब वैश्विक समस्याओं का समाधान देने वाली शक्ति बनकर उभर रहा है।”
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया उल्लेख
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र बनने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ‘नो फर्स्ट यूज’ की परमाणु नीति के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन देश किसी भी प्रकार की परमाणु ब्लैकमेलिंग को स्वीकार नहीं करेगा।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात करीब 40 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। आने वाले एक-दो वर्षों में रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कोरियन वॉर मेमोरियल पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
दक्षिण कोरिया दौरे की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने सियोल स्थित कोरियन वॉर सेमेट्री पहुंचकर युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दक्षिण कोरिया के लोगों के प्रति भारत की एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका साहस और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।