2026-04-30 13:28:01
अंडमान-निकोबार द्वीप / भव्य खबर । हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया। यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि अंडमान-निकोबार में हो रहे कथित पर्यावरणीय और सामाजिक बदलावों को करीब से देखने और समझने का प्रयास था। दौरे के बाद उन्होंने जो कुछ कहा, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“ये जंगल सिर्फ पेड़ नहीं, इतिहास हैं”
राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार के घने वर्षावनों को देखकर कहा कि ये जंगल साधारण नहीं हैं। यहां ऐसे पेड़ हैं जो सैकड़ों साल पुराने हैं—ऐसे वन जो कई पीढ़ियों के साथ विकसित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि इन वनों की प्राकृतिक समृद्धि और सुंदरता अद्भुत है, लेकिन आज यही जंगल बड़े खतरे के सामने खड़े हैं।
“ये प्रोजेक्ट नहीं, विनाश है”
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार जिस काम को “प्रोजेक्ट” बता रही है, वह असल में बड़े पैमाने पर विनाश है।
उनके अनुसार, यहां लाखों पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया है और लगभग 160 वर्ग किलोमीटर का वर्षावन खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने इसे देश की प्राकृतिक विरासत पर सीधा हमला बताया।
“इकोलॉजिकल चोरी” का आरोप
राहुल गांधी ने इस पूरे मुद्दे को “इकोलॉजिकल चोरी” करार दिया। उनका कहना था कि अंडमान-निकोबार में करोड़ों रुपए की कीमत वाले पेड़ काटे जा रहे हैं और ज़मीन छीनी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की जमीन उनसे बिना पूछे ली जा रही है और बड़े उद्योगपतियों—जैसे अडानी—को सौंपी जा रही है।
आदिवासी और स्थानीय समुदायों की अनदेखी
दौरे के दौरान उन्होंने आदिवासी समुदायों और स्थानीय निवासियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि ये लोग इस द्वीप की असली पहचान हैं, लेकिन आज इन्हीं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
राहुल गांधी के अनुसार, लोगों के घर छीने जा रहे हैं, उनकी सहमति नहीं ली जा रही और उन्हें उचित मुआवज़ा भी नहीं दिया जा रहा।
प्रशासन पर गंभीर सवाल
उन्होंने अंडमान-निकोबार के प्रशासन, खासकर एलजी (लेफ्टिनेंट गवर्नर) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां भ्रष्टाचार है और प्रशासन “राजा” की तरह काम कर रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भले ही उनके आवास और दफ्तर का नाम “लोक भवन” रखा गया है, लेकिन वे आम जनता से मिलते नहीं हैं और उनकी समस्याओं को नहीं सुनते।
लोकतंत्र और अधिकारों की बात
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए और उनका सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर न तो पर्यावरण को नष्ट किया जाना चाहिए और न ही लोगों के अधिकार छीने जाने चाहिए।
सरकार से अपील
उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार करने और इसे रोकने की मांग की। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो देश अपनी अनमोल प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत खो देगा।
एक स्पष्ट संदेश
राहुल गांधी का संदेश साफ था—यह सिर्फ एक द्वीप का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश की विरासत, पर्यावरण और लोकतांत्रिक मूल्यों का सवाल है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे इस सच्चाई को समझें और इसके खिलाफ आवाज़ उठाएं।