2026-04-30 13:54:08
चंडीगढ़ / भव्य खबर । मानसून के नजदीक आते ही बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार 14 मई, 2026 को 13 बाढ़ संभावित जिलों में बाढ़ आपदा की स्थिति पर राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास (मॉक ड्रिल) आयोजित करने जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासनिक तंत्र, राहत टीमें और संचार व्यवस्था तेजी से और प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
मानसून से पहले तैयारी को मजबूत करने की कवायद
हर साल मानसून के दौरान कई राज्यों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पिछले वर्ष भी हरियाणा के कुछ हिस्सों में अधिक वर्षा के चलते जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति देखने को मिली थी, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ था और राहत एवं बचाव कार्यों की बड़ी जरूरत पड़ी थी।
इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार ने पहले से तैयारी को मजबूत करने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी आपदा के दौरान नुकसान को कम से कम किया जा सके।
13 जिलों में होगी व्यापक मॉक ड्रिल
इस मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ प्रभावित होने की आशंका वाले 13 जिलों में आपातकालीन स्थिति जैसी परिस्थितियां तैयार की जाएंगी। इसमें राहत और बचाव दलों की तैनाती, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, चिकित्सा सहायता और संचार व्यवस्था की जांच जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अभ्यास किया जाएगा।
समन्वय और संचार प्रणाली पर विशेष ध्यान
आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस अभ्यास को लेकर कहा कि यह ड्रिल जिला स्तर के आपातकालीन सहायता कार्यों के बीच समन्वय को मजबूत करेगी और आपदा स्थितियों के दौरान संचार प्रणालियों में सुधार लाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसी मॉक ड्रिल से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वास्तविक आपदा की स्थिति में सभी एजेंसियां तेज़ी और बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकें।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में कदम
राज्य सरकार का मानना है कि समय-समय पर इस तरह के अभ्यास से न केवल प्रशासन की तैयारी मजबूत होती है, बल्कि आम जनता में भी जागरूकता बढ़ती है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए यह कदम एक महत्वपूर्ण रणनीति का हिस्सा है।
लक्ष्य—नुकसान कम से कम और प्रतिक्रिया तेज
इस पूरी पहल का उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी भी बाढ़ या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके और राहत कार्य तेजी से शुरू हो सकें।
सरकार का कहना है कि आपदा प्रबंधन केवल प्रतिक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि पूर्व तैयारी और समन्वय से ही प्रभावी बनाया जा सकता है।