मानव जीवन का उद्देश्य सेवा और ईश्वर की भक्ति है सागर आनंद महाराज

कथा में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, भिंड सांसद संध्या राय, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन ने की आरती
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2026-05-12 19:53:15

ग्वालियर / भव्य खबर । पुरुषार्थ सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में ठाठीपुर स्थिति संत कबीर आश्रम में सप्त दिवसीय संत शिरोमणि रविदास जी महाराज संगीतमयी कथा के छठवें दिवस सदना को दिए उपदेश से उसने बूचड़खाना बंद कर भक्ति मार्ग अपनाया तथा संत कबीर दास जी को पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति की कथा और उनके द्वारा समाज में फैली कुरीतियों को लेकर प्रेरक प्रसंग समाज को जागरूक करने संदेश दिए गए। आज व्यास पीठ की आरती विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, भिंड सांसद संध्या राय, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन सहित अन्य गणमान्य लोगों ने की। कथावाचक उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत श्री सागर आनंद जी महाराज ने ओजस्वी वाणी से संत शिरोमणि संत रविदास जी महाराज की शिक्षाओं एवं मानवता के संदेश पर सदना कसाई को दिए गए उपदेश और उससे हुए आध्यात्मिक परिवर्तन पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संत श्री सागर आनंद जी महाराज ने प्रवचन में बताया गया कि सदना कसाई पशुओं के वध एवं बूचड़खाने के कार्य से जुड़े हुए थे। एक दिन उन्हें संत रविदास जी महाराज का सत्संग एवं उपदेश सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। संत रविदास जी ने उन्हें अहिंसा, दया, करुणा और प्रभु भक्ति का मार्ग बताते हुए समझाया कि प्रत्येक जीव में परमात्मा का वास होता है तथा मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य सेवा, सदाचार और ईश्वर की भक्ति है।

संत रविदास जी महाराज के अमृतमय वचनों का सदना कसाई के हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनके भीतर आत्मज्ञान का प्रकाश जागृत हुआ और उन्होंने हिंसा एवं पशु वध का कार्य त्यागने का संकल्प लिया। इसके बाद सदना कसाई ने बूचड़खाना बंद कर पूर्ण रूप से भक्ति, सत्संग और प्रभु स्मरण का मार्ग अपना लिया। आगे चलकर वे संत परंपरा में एक भक्त के रूप में प्रसिद्ध हुए।

संत श्री सागर आनंद जी महाराज ने कहा कि संत रविदास जी महाराज ने सदैव समाज को समरसता, समानता और मानवता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं यह प्रेरणा देती हैं कि कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से आत्मचिंतन और सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को बदल सकता है। संतों की वाणी मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और हिंसा से करुणा की ओर ले जाती है।

संत श्री सागर जी महाराज ने संत कबीर दास जी महाराज पर विस्तार से कथा का वर्णन करते हुए कहा कि संत कबीर दास महाराज ने सांसारिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और अंधविश्वास का विरोध करते हुए सच्चे ज्ञान एवं ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाया। उन्होंने गुरु की महिमा को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य को आत्मज्ञान और परम सत्य की प्राप्ति होती है। संत कबीर दास जी महाराज को जब पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ, तब उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, सत्य प्रचार और समाज सुधार के लिए समर्पित कर दिया।

संत श्री सागर महाराज ने कहा कि संत कबीर दास जी की वाणी आज भी समाज को जागरूक करने का कार्य कर रही है। उनके दोहे और उपदेश मनुष्य को प्रेम, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने सदैव यह संदेश दिया कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि निर्मल मन, सच्ची भक्ति और अच्छे कर्मों में निहित है।

श्री सागर जी महाराज ने बड़े सुंदर सुंदर प्रसंग सुनाए और कबीरदास जी महिमा रविदास महाराज जी भजनों पर सभी बड़े ही श्रद्धा भाव से सुनें। कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रवण किया। अंत में भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण हुआ ।

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