2026-02-10 10:27:21
उतरैणी कौतिक’ इस शब्द में उतरैणी का अर्थ है कि सूर्य देेव का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना है और कौतिक का अर्थ है मेंला, हर वर्ष सूर्य देव छः माह उत्तरायण में रहते है और छः माह दक्षरायण में, मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करते है इस घटना को कुमाऊनी में उत्तरायणी कहा जाता है उत्तर और पूरब दिशा को धर्म शास्त्रों के अनुसार शुभ माना गया है, अनेकानेक शुभ कार्यों की सुरुआत भी इसी दिन से शुरू होती है। उत्तराणी के मेले अवधि में खास तौर से बागेश्वर में तट पर दूर-दूर से श्रद्धालु, भक्तजन आकर मुडंन, यग्योपवीत (जनेऊ धारण करना), पूजा अर्चना, करने आते हैं
उतरैणी का भी गौरवमय इतिहास है । प्राप्त प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि चंद वंशीय राजाओं के शासनकाल में ही माघ मेले की नींव पड़ी थी,चंद राजाओं ने ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर में पुजारी भी नियुक्त किय थेे ।
हमारे बडे बताते हैं कि महीनों पूर्व से कौतिक में चलने का क्रम शुरु होता । धीरे-धीरे सब जगह के लोग मिलके हुड़के और अन्य बाध्य यंत्रों से सबका मन मोह लेते थे । फलस्वरुप लोकगीतों और नृत्य का आयोजन होने लगा, हुड़के की थाप पर कुमाऊनी नृत्य, हाथ में हाथ डाल लोग मिलने की खुशी से नृत्य-गीतों के बोल का क्रम मेले का अनिवार्य अंग बन गया । आज भी हमारे आमा बूबू याद करते है उस समय मेले की रातें किस तरह अपने आपमे अनोखी लुभावनी हुआ करती थी । प्रकाश की व्यवस्था अलाव जलाकर होती थी। काँपती सर्द रातों में अलाव जलते ही ढोड़े, चांचरी, भगनौले, छपेली जैसे नृत्यों का अलाव के चारों ओर स्वयं ही विस्तार होता जाता था।
नुमाइश खेत में रांग-बांग होता जिसमें जगह जगह के लोग अपने यहाँ के गीत गाते । सबके अपने-अपने नियत स्थान थे । परम्परागत गायकी में प्रश्नोत्तर करने वाले बैरिये भी न जाने कहाँ-कहाँ से इकट्ठे हो जाते । काली कुमाऊँ, मुक्तेश्वर, रीठआगाड़, सोमेश्वर और कव्यूर के बैरिये झुटपूटा शुरु होने का ही जैसे इन्तजार करते । इनकी कहफिलें भी बस सूरज की किरणें ही उखाड़ पातीं । कौतिक आये लोगों की रात कब कट जाती मालूम ही नहीं पड़ता था ।
धीरे-धीरे धार्मिक और आर्थिक रुप से समृद्ध यह मेला व्यापारिक गतिविधियों का भी प्रमुख केन्द्र बन गया । भारत और नेपाल के व्यापारिक सम्बन्धों के कारण दोनों ही ओर के व्यापारी इसका इन्तजार तरते । तिब्बती व्यापारी यहाँ ऊनी माल, चँवर, नमक व जानवरों की खालें लेकर आते । भोटिया-जौहारी लोग गलीचे, दन, चुटके, ऊनी कम्बल, जड़ी बूटियाँ लेकर आते । नेपाल के व्यापारी लाते शिलाजीत, कस्तूरी, शेर व बाघ की खालें । स्थानीय व्यापार भी अपने चरमोत्कर्ष पर था । दानपुर की चटाइयाँ, नाकुरी के डाल-सूपे, खरदी के ताँबे के बर्तन, काली कुमाऊँ के लोहे के भदेले, गढ़वाल और लोहाघाट के जूते आदि सामानों का तब यह प्रमुख बाजार था । गुड़ की भेली से लेकर मिश्री और चूड़ी चरेऊ से लेकर टिकूली बिन्दी तक की खरीद फरोख्त होती । माघ मेला तब डेढ़ माह चलता । दानपुर के सन्तरों, केलों व बागेश्वर के गन्नों का भी बाजार लगता और इनके साथ ही साल भर के खेती के औजारों का भी मोल भाव होता । बीस बाईस वर्ष पहले तक करनाल, ब्यावर, लुधियाना और अमृतसर के व्यापारी यहाँ ऊनी माल खरीदने आते थे ।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026
देहरादून में उत्तरायणी कौथिक महोत्सव यह चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव 5 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उत्तराखंड की लोक परंपराओं, लोक संगीत, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाला यह महोत्सव शहरवासियों और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होने वाला है।
महोत्सव में विभिन्न दिनों को खास थीम दी गई है।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 पूरी तरह उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, झोड़ा-छोलिया जैसे नृत्यों, लोक गीतों और पारंपरिक वेशभूषा को समर्पित किया. उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध कलाकारों जैसे पवनदीप राजन, नरेंद्र सिंह नेगी, किशन महिपाल, अजब सिंह तोमर, खुशी जोशी, गोविंद अधिकारी और अन्य की प्रस्तुतियां होंगी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 के शुभारम्भ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई एवं राज्यपाल द्वारा प्रदेश में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 समाजसेवकों को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं,बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा,सामूहिक चेतना और प्रकृति के साथ संतुलनपूर्ण जीवन-दृष्टि का प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन,ऊर्जा और प्रकाश का संदेश देती है। यह पर्व समाज को निराशा से संकल्प की ओर तथा जड़ता से प्रगति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने उत्तरायणी को ऋतु-चक्र आधारित वैज्ञानिक चेतना और प्रकृति के साथ सामंजस्य का सजीव उदाहरण बताया। उन्होंने उत्तराखण्ड की कौथिक (मेले) परम्परा को लोकजीवन की धड़कन बताते हुए कहा कि ये आयोजन सामाजिक एकता,सांस्कृतिक निरंतरता और लोकस्मृति के जीवंत केंद्र रहे हैं।लोकगीत,लोकनृत्य,पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प उत्तराखण्ड की जीवंत,जाग्रत और गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के प्रतीक हैं।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं,बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना से अनुप्राणित भूमि है। देवभूमि के वीर सपूतों ने सदैव राष्ट्र की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के संकल्प की चर्चा करते हुए कहा कि योग,आयुष,शिक्षा,पर्यटन,जैव विविधता,जल-स्रोत संरक्षण,रक्षा सेवाओं और मानव संसाधन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश को दिशा देने की क्षमता रखता है। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के लोगों की ईमानदारी,सादगी और कर्मठता को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया।उन्होंने स्वामी रामतीर्थ,वीर चंद्र सिंह गढ़वाली,तीलू रौतेली,गौरा देवी,बछेंद्री पाल, राइफलमैन जसवंत सिंह रावत और जनरल बिपिन रावत जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण साधारण व्यक्ति को भी इतिहास निर्माता बना देता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव
लोककला,लोकसंगीत,लोकनृत्य,हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को नई पहचान देता है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को व्यवहारिक रूप से साकार करता है। उन्होंने युवाओं से नशे और व्यसनों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा,खेल,कौशल और सेवा के माध्यम से ही सशक्त उत्तराखण्ड और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।
राज्यपाल ने सेवा संकल्प फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति तभी जीवित रहती है,जब वह सेवा,करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी हो। उन्होंने उत्तरायणी महोत्सव को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक चेतना,सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव को नई ऊँचाइयाँ देने वाला बताया और सभी को शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर ट्रस्टी संस्थापक,सेवा संकल्प फाउंडेशन गीता धामी,प्रथम महिला गुरमीत कौर,कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल,मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल,आईएमए कमांडेंट ले.ज.नागेन्द्र सिंह सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का भव्य समापन
सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 के समापन समारोह में रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 के सफल आयोजन पर सेवा संकल्प फाउंडेशन को बधाई देते हुए कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की आत्मा, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक जैसे सांस्कृतिक उत्सव न केवल प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और उत्पादों को भी एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को हर संभव सहयोग देती रहेगी।
पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी लोगों का राज्य की संस्कृति के प्रति बड़ा प्रेम है। हमारे राज्य की परंपराओ के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष प्रेम है। हर क्षेत्र हमारी बालिकाएं, महिलाएं आगे हैं। हमारी मातृशक्ति निरंतर देश प्रदेश को आगे बढ़ा रही हैं।
अध्यक्ष केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी ने कहा कि हमारे उत्तराखंड की संस्कृति बांसुरी की तरह है, जिससे सुनने के लिए शांति की आवश्यकता है। पूरे विश्व में जो शोर है, उसमें उत्तराखंड की संस्कृति “बांसुरी” की तरह शांत है। उन्होंने कहा हमने अपनी भाषा को बचाना है, और इसके लिए बड़े तौर पर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा निर्णयों से हम तस्वीर बदल सकते हैं। हमने भाषा को बचाने का निर्णय लेना होगा। उन्होंने कहा कि मातृ भाषा पर गर्व करना बेहद जरूरी है।
सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने कहा कि बीते 4 दिनों से इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को जीवंत रखने का कार्य किया गया है। इस महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद, जीवनशैली को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा इस महोत्सव का शुभारंभ शंखनाद से हुआ था। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन सभी की मेहनत का फल है।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक में पूरे राज्य से लोग आए। यह मात्र संस्था का नहीं बल्कि पूरे राज्य का आयोजन है। जिसमें पूरे राज्य से लोगों ने प्रतिभाग किया है। हमने इस कौथिक के माध्यम से पूरे राज्य की संस्कृति एक मंच पर दिखाया। उन्होंने कहा युवा पीड़ी को इतिहास से जोड़ते हुए उनका भविष्य बनाना है। उन्होंने कहा हमने अपने भविष्य को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान है। हमारी सनातन संस्कृति ही सबसे पुरातन संस्कृति है। हमें गर्व है कि हम उत्तराखंड और भारत के लोग हैं। उन्होंने सभी से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की अधिक से अधिक खरीदारी करने की बात कही। उन्होंने कहा जिससे हम राज्य के अर्थव्यवस्था को बढ़ा सके और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाएं।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू हुआ, सख्त नकल विरोधी लागू कर हजारों लोगों को रोजगार दिया है।
आज उत्तराखंड नए आयाम स्थापित कर रहा है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि हर्ष का विषय है कि सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति पारंपरिक खानपान और प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। इस महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को समर्पित कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इसके अलावा इस आयोजन में विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के विद्यार्थियों की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया सम्मानित
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया। सम्मानित व्यक्तियों ने अपने कार्यों से समाज में प्रेरणा और उदाहरण पेश किया है। इस अवसर पर महावीर लाल, अनुश्रिया गुलाटी, मनमोहन भारद्वाज, शशि थपलियाल, पुष्पा देवी, कन्हैया सिंह, संजना मंडल, अपर्णा पनेरू, चम्पा पांगती और राजमती देवी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करते हैं।
साहित्य के रंग में रंगा महोत्सव
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में शब्दों, भावनाओं और साहित्य की शानदार प्रस्तुति देखने को मिली। कार्यक्रम में विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति, देशभक्ति और जीवन के विविध पहलुओं को प्रस्तुत किया। कवियों की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे पंडाल में साहित्यिक उत्साह का वातावरण बना रहा। कवि सम्मेलन के दौरान लोगों की तालियों की गूंज के बीच कविताओं की गंगा बहती रही। हास्य, ओज, श्रृंगार और संवेदनाओं से भरपूर रचनाओं ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
उत्तरायणी महोत्सव में लोकगीतों ने मचाई धूम
उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत करते हुए उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में इन्द्र आर्या, बी.के सामंत मनमोहन बटकोरा, रेशमा शाह और अरविंद राणा के लोकगीतों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। उनकी स्वर और गायन की मधुर प्रस्तुति पर लोग झूम उठे और नाचने लगे।
नशा मुक्ति अभियान के साथ गंगा की सफाई का दिया संदेश
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े आयोजनों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। महोत्सव के दौरान नशा मुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। सी.आई.एम.एस कॉलेज के छात्रों द्वारा ड्रग्स अब्यूज़ विषय पर प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने दर्शकों को तक सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाया।
कार्यक्रम में ‘रिजर्व गंगा अवतरण’ की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। जो मोंटेसरी स्कूल के बच्चों ने दी। संगीत के साथ आयोजित संगीतिमय योगा कार्यक्रम ने दर्शकों को स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश दिया। इसके अलावा कथक नृत्य की सुंदर प्रस्तुति ने सांस्कृतिक संध्या को और भी आकर्षक बना दिया, जिस पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
नींबू सानो जैसी अनोखी प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के अंतर्गत आयोजित नींबू सानो प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा कर विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। जिसमें प्रथम पुरस्कार रेखा, प्रियंका विष्ट, सममणि जोशी, द्वितीय पुरस्कार तारा देवी, वांदनी, पंकज कुमार और तृतीय पुरस्कार भूपाल सिंह नेगी, गीता नेगी को दिया गया।
कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, अध्यक्ष केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी, राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, देवेंद्र सिंह बिष्ट, विधायक खजान दास, विधायक दुर्गेश्वर लाल, विधायक अनिल नौटियाल, विधायक भोपाल राम टम्टा, विधायक सुरेश गढ़िया, अजेय कुमार, बिशना देवी, अपर्णा जोशी, डीजीपी दीपम सेठ, दायित्वधारी राज्य मंत्री हेमराज बजरंगी, मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना, गीताराम गौड़, विश्वास डाबर, श्याम अग्रवाल, विनोद उनियाल, नेहा शर्मा, हरक सिंह, मुकेश कुमार, ज्योति गैरोला, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव।