आईएसबीटी बस स्टेशन पर नियमों को ताक पर रखकर कराया जा रहा निर्माण कार्य

मजदूरों की जान खतरे में, विभागों ने साधी चुप्पी, कार्रवाई का आश्वासन
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2026-08-24 08:59:12

नई दिल्ली/ भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव । राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) पर चल रहे निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां काम कर रहे सैकड़ों मजदूर बिना किसी सेफ्टी गियर (सुरक्षा उपकरण) के खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। कार्यस्थल पर न तो मजदूरों के सिर पर हेलमेट दिख रहा है और न ही ऊंचाई पर काम करने के लिए सेफ्टी हार्नेस (सुरक्षा बेल्ट) का इंतजाम है। इस लापरवाही के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्या कहता है भारत का कानून?

भारत में निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान हैं, जिनका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान है: भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 (BOCW Act): यह कानून मुख्य रूप से निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करता है। इसके तहत नियोक्ता की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह हर मजदूर को मुफ्त में हेलमेट, बूट, दस्ताने और सुरक्षा बेल्ट जैसे उपकरण उपलब्ध कराए।

भारतीय न्याय संहिता 2023: यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण किसी मजदूर की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह गंभीर रूप से घायल होता है, तो ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही से मौत (धारा 106) और जीवन को खतरे में डालने के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

फैक्ट्रीज एक्ट और लेबर कोड: नए श्रम कानूनों के तहत भी कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल देना अनिवार्य है। पर्याप्त प्रकाश, प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) और आपातकालीन निकास की व्यवस्था न होना कानूनन अपराध है।

जमीनी हकीकत: नियमों की अनदेखी

आईएसबीटी जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थान पर चल रहे इस प्रोजेक्ट में जिम्मेदार एजेंसियां और ठेकेदार कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। धूल से बचने के लिए मजदूरों के पास न तो मास्क हैं और न ही पैरों में सुरक्षा जूते। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि प्रशासन सब कुछ देखकर भी अनजान बना हुआ है। यदि समय रहते लेबर विभाग और संबंधित अथॉरिटी ने इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो प्रशासन की यह चूक किसी मजदूर के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

संबंधित विभागों का पक्ष: विभागों ने साधी चुप्पी, कार्रवाई का आश्वासन

इस पूरे मामले पर जब डीटीआईडीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि, नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, ठेकेदार को सभी सुरक्षा मानकों का पालन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अगर जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही हो रही है, तो हम तुरंत साइट का निरीक्षण कर संबंधित निर्माण कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे।

दूसरी ओर, दिल्ली लेबर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा, बीओसीडब्ल्यू एक्ट के तहत मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ कानूनन अपराध है। आईएसबीटी जैसी सार्वजनिक जगह पर सुरक्षा उपकरणों के बिना काम कराना गंभीर मामला है। हम जल्द ही एक जांच टीम भेजकर कार्यस्थल का ऑडिट करवाएंगे और दोषी ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

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