2026-04-24 19:54:41
देहरादून/ भव्य खबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज उनके शासकीय आवास पर हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिमालयी राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना और साझा चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए एक प्रभावी रणनीति तैयार करना रहा।
बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाएंगे हिमालयी राज्य
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियाँ लगभग एक जैसी हैं। ऐसे में एक-दूसरे के अनुभवों और सफल प्रयोगों (Best Practices) से सीखकर प्रभावी नीतियां बनाई जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन राज्यों ने विशिष्ट क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके कार्यों का अध्ययन कर उन्हें उत्तराखण्ड में लागू किया जाए।
इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य अर्थव्यवस्था (Economy) और पारिस्थितिकी (Ecology) के बीच समन्वय बिठाकर जन-जीवन के स्तर को सुधारना है। उन्होंने कहा, उत्तराखण्ड जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है। यहाँ हिमालय और औषधियों के संरक्षण की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें धरातल पर उतारने की जरूरत है।
जल संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता
बैठक में जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण और संरक्षण पर विशेष चर्चा हुई। परिषद के सदस्य और विधायक किशोर उपाध्याय ने हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह के वैज्ञानिक आकलन की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि परिषद का प्रयास हिमालयी चुनौतियों के समाधान के लिए सभी संबंधित राज्यों को एक मंच पर लाकर एकीकृत रूप से कार्य करना है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, आचार्य डॉ. प्रशांत, डॉ. जी.एस. रावत सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र की अद्यतन पारिस्थितिकी के अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण में जुटे संस्थानों के सहयोग लेने पर सहमति जताई।