अम्बाला छावनी में बना एशिया का सबसे बड़ा 1857 शहीद स्मारक, जल्द पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन ऊर्जा मंत्री अनिल विज

1857 के अनसुने वीरों को समर्पित राष्ट्रीय स्मारक बनेगा देशभक्ति की प्रेरणा : अनिल विज
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2026-05-12 19:44:15

चंडीगढ़/ भव्य खबर। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि अम्बाला छावनी में निर्मित एशिया के सबसे बड़े “आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक” का उद्घाटन शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा, क्योंकि यह केवल हरियाणा का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की गौरवगाथा को समर्पित एक राष्ट्रीय स्मारक है।

मंत्री विज आज यहां चण्डीगढ़ में मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार पूरे देश में ऐसा दूसरा स्मारक नहीं है, जहां 1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े संघर्षों को इतने व्यापक और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया गया हो। उन्होंने बताया कि अम्बाला, मेरठ, दिल्ली, झांसी, आगरा सहित देशभर में जहां-जहां अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष हुए, उन सभी ऐतिहासिक दृश्यों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनः सजीव किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह समझ सकें कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई 1857 से ही प्रारंभ हो चुकी थी।

मंत्री विज ने कहा कि इतिहास में अक्सर स्वतंत्रता आंदोलन के दूसरे चरण का अधिक उल्लेख किया गया, जिसे कांग्रेस से जोड़ा जाता है, जबकि कांग्रेस की स्थापना वर्ष 1885 में हुई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के गठन से 28 वर्ष पहले ही देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ एक व्यापक और सशस्त्र जनआंदोलन शुरू हो चुका था, जिसमें हजारों सैनिकों, किसानों और आम नागरिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि अनेक वीरों को पेड़ों से बांधकर गोलियों से भून दिया गया, लेकिन उन बलिदानों को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन्हीं “अनसंग हीरोज” को सच्ची श्रद्धांजलि देने और इतिहास की इस भूल को सुधारने के उद्देश्य से अम्बाला छावनी में 22 एकड़ भूमि पर एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि स्मारक परिसर में एक विशेष “श्रद्धांजलि स्थल” भी बनाया गया है, जहां लोग देश के उन अमर शहीदों को नमन कर सकेंगे, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

मंत्री विज ने कहा कि यह स्मारक केवल ईंट-पत्थरों का निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, बलिदान और भारत के गौरवशाली इतिहास की जीवंत प्रेरणा है, जो आने वाली पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करेगा।

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