2025-02-06 19:31:04
नई दिल्ली। अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों को भेजे जाने के बाद अब अमेरिकी सीमा पुलिस ने इसका वीडियो जारी किया है। अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल पुलिस की तरफ से जारी किए वीडियो और तस्वीरों में हथकड़ीं और जंजीरों में बंधे भारतीयों को दिखाया गया है। बुधवार 5 फरवरी को अमेरिकी सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर सैन्य परिवहन विमान 104 भारतीयों को लेकर भारत के पंजाब प्रांत के अमृतसर में उतरा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामूहिक निर्वासन अभियान के तहत अवैध प्रवासियों को अमेरिकी सेना के जरिए उनके देश में वापस भेजा जा रहा है। अमेरिका की बॉर्डर पेट्रोल पुलिस चीफ माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, यूएसबीबी और उसके सहयोगी ने अवैध विदेशियों को सफलतापूर्वक भारत वापस भेजा, जो सैन्य परिवहन का उपयोग करते हुए अब तक की सबसे लंबी निर्वासन उड़ान थी। यह मिशन आव्रजन कानूनों को लागू करने और त्वरित निष्कासन सुनिश्चित करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यदि आप अवैध रूप से सीमा पार करते हैं, तो आपको हटा दिया जाएगा। इस बीच निर्वासन फ्लाइट को लेकर भारत में अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि हमारे राष्ट्र के आव्रजन कानूनों को लागू करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी अस्वीकार्य और हटाए जाने वाले विदेशियों के खिलाफ आव्रजन कानूनों को लागू करना अमेरिका की नीति है। डिपोर्टेशन फ्लाइट से आने वाले एक भारतीय ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 40 घंटों तक उन्हें हथकड़ी लगाई गई। उनके पैरों को जंजीरों से बांधा गया और हिलने तक नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि बार-बार अनुरोध करने के बाद शौचालय जाने की अनुमति मिली, तो भी जंजीर को नहीं खोला गया। उन्हें खुद को घिसट-घिसटकर शौचालय जाना पड़ा। क्रू के सदस्य दरवाजा खोलते और शौचालय में धकेल देते। एक 40 वर्षीय युवक ने बताया कि उन्हें हथकड़ी लगे हुए ही खाने को मजबूर किया जाता था। उन लोगों ने खाने के लिए कुछ मिनटों के लिए हथकड़ी हटाने का अनुरोध किया, लेकिन उसे सुना नहीं गया। अमेरिका से भारत की यात्रा को लोगों ने दर्दनाक बताया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 18,000 भारतीयों की पहचान की है, जिन्हें वापस भारत भेजा जाना है। हालांकि, कुछ रिसर्च इस संख्या को काफी अधिक बताती हैं। प्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 7 लाख से ज्यादा अवैध प्रवासी भारतीय हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि अमेरिका में बिना दस्तावेज़ों के रह रहे भारतीयों को निर्वासित किए जाने की प्रक्रिया नयी नहीं है और यह सभी देशों का दायित्व है कि यदि उनके नागरिक विदेशों में अवैध रूप से रह रहे हैं तो उन्हें वापस ले। राज्यसभा में इस संबंध में एक बयान देते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका की सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं कि निर्वासित लोगों के साथ दुर्व्यवहार न हो। उन्होंने कहा कि यह सभी देशों का दायित्व है कि यदि उनके नागरिक विदेश में अवैध रूप से रह रहे पाए जाते हैं तो वे अपने नागरिकों को वापस लें। यह नीति केवल एक देश पर लागू नहीं है। निर्वासन की प्रक्रिया कोई नयी नहीं है, यह कई वर्षों से है।
गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापक वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आगामी वाशिंगटन यात्रा से कुछ ही दिन पहले यह कार्रवाई हुई है। निर्वासित लोगों में से 30 पंजाब से, 33-33 हरियाणा और गुजरात से, तीन-तीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से तथा दो चंडीगढ़ से हैं। निर्वासित किये गये लोगों में 19 महिलाएं और चार वर्षीय एक लड़का, पांच व सात वर्षीय दो लड़कियों सहित 13 नाबालिग शामिल हैं।
संवाददाता : रमण श्रीवास्तव / एजेंसी