2026-04-12 13:33:14
गुरुग्राम/ भव्य खबर । नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम बनकर सामने आया है। 106वें संविधान संशोधन के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जो देश की आधी आबादी को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी तक सीमित न रखकर उन्हें नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाना है। अब तक पंचायत स्तर पर आरक्षण का लाभ लेने वाली महिलाएं सीधे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानून न केवल राजनीतिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि शासन में संवेदनशीलता, संतुलन और दूरदर्शिता भी लाएगा। खास बात यह है कि इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे सामाजिक समावेशन को और मजबूती मिलेगी। वर्षों से नीति-निर्माण में महिलाओं की सीमित भागीदारी को देखते हुए यह अधिनियम एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। महिला नेतृत्व स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जमीनी दृष्टिकोण लेकर आता है, जिससे नीतियां अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनेंगी। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार-“किसी समाज की प्रगति को महिलाओं की प्रगति से मापा जा सकता है”-आज इस अधिनियम के माध्यम से साकार होते दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। यह अधिनियम न केवल महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संरचना को अधिक समावेशी और संतुलित बनाएगा। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर विकसित भारत-2047 की मजबूत नींव रखने में सहायक होगा। लेखक : डॉ.अंजू काजल, प्रधानाचार्य, रा॰ व॰ मा॰ विद्यालय झाड़सा गुरुग्राम