‘हर काम देश के नाम’ उत्तरी प्रौद्योगिकी संगोष्ठी में तकनीकी युद्ध की तैयारी पर जोर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “उत्तरी प्रौद्योगिकी संगोष्ठी” का आयोजन किया गया
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2026-05-04 23:10:47

उत्तर प्रदेश / भव्य खबर । तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य और प्रौद्योगिकी क्रांति के दौर में भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “उत्तरी प्रौद्योगिकी संगोष्ठी” का आयोजन किया गया, जिसमें देश की सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और भविष्य के युद्धों की रणनीति पर विस्तृत मंथन हुआ।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आज के प्रौद्योगिकी-चालित युग में भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए अनुसंधान और अप्रत्याशित नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी क्रांति को सबसे तेजी से अपनाएगा, वही भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा। उनके अनुसार, आने वाले समय के युद्ध आज प्रयोगशालाओं में तय हो रहे हैं, इसलिए अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है।

रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष ने यह दिखा दिया है कि कुछ ही वर्षों में युद्ध टैंकों और पारंपरिक हथियारों से बदलकर ड्रोन, संवेदक और अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज सामान्य वस्तुएं भी युद्ध के घातक हथियार बन सकती हैं, जैसा कि पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए हमलों में देखा गया। ऐसे में भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश को ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जो आवश्यकता पड़ने पर शत्रु पर अप्रत्याशित आक्रमण करने में सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि युद्ध में विजय उसी को मिलती है, जिसके पास अचानक और प्रभावी आक्रमण की शक्ति होती है।

रक्षा अनुसंधान को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि DRDO के माध्यम से इस क्षेत्र को लगातार सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह संस्था अब अकेले कार्य नहीं कर रही, बल्कि उद्योगों, नवोद्यमों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर आगे बढ़ रही है। रक्षा अनुसंधान बजट का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा इन भागीदारों को दिया जा रहा है और अब तक चार हजार पाँच सौ करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है। साथ ही, इस संस्था द्वारा दो हजार दो सौ से अधिक प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को हस्तांतरण किया जा चुका है।

रक्षा मंत्री ने निर्देशित ऊर्जा हथियार, अतिध्वनि गति वाले हथियार, जलमग्न क्षेत्र, अंतरिक्ष क्षेत्र, क्वांटम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अधिगम जैसे उभरते क्षेत्रों में तेजी से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उद्योगों से इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने का आह्वान किया और सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।

अपने संबोधन में उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए इसे भारत की तकनीकी क्षमता और सैन्य तैयारी का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में आकाशतीर, आकाश प्रक्षेपास्त्र प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग हुआ, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल युद्ध की बदलती प्रकृति को समझता है, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आधुनिक तकनीक को लागू भी कर रहा है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन एक लाख चौवन हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात अड़तीस हजार चार सौ चौबीस करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह वृद्धि आने वाले समय में और तेज होगी।

इस संगोष्ठी में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमान-इन-चीफ एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के प्रोफेसर रामकृष्णन एस सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नवोद्यमी और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों, तकनीकी आवश्यकताओं और नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें दो सौ चौरासी कंपनियों ने अपने स्वदेशी उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।

यह “उत्तरी प्रौद्योगिकी संगोष्ठी” न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने का मंच बनी, बल्कि यह भारत को भविष्य की एक सशक्त सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रही है।

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