2025-03-17 12:48:23
देहरादून/ भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव। उत्तराखंड की स्थित चारधाम यात्रा शुरू होने में अभी थोड़ा समय बाकी है। इससे पहले केदारनाथ में गैर हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। बीजेपी विधायक ने इस पर बड़ा बयान भी दे दिया। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि इस बार केदानाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लग सकती है। इस बार चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया यानी 30 अप्रैल 2025 से होने जा रही है। केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई से खुलेंगे। इससे पहले केदारनाथ में गैर हिंदूओं की एंट्री बैन करने के मुद्दे ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया। केदारनाथ से बीजेपी विधायक आशा नौटियाल ने कई तथ्यों को सामने रखकर केदारनाथ यात्रा में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कुछ गैर हिंदू केदारनाथ धाम को बदनाम करने के लिए वहां पर मांस, मछली और शराब परोसने का काम करते हैं। ऐसे में उन लोगों को चिन्हित करते हुए उन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। मेरा यही प्रयास है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले दिनों प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी वहां पर तमाम लोगों के साथ बैठक की जिसमें यह सुझाव भी आया था कि गैर हिंदू केदारनाधाम को बदनाम करने का काम करते हैं उन्हें चिन्हित किया जाए और उन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। गौरतलब है कि इससे पहले प्रयागराज में लगे महाकुंभ 2025 में भी गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग का मुद्दा खूब सुर्खियों में छाया रहा। इस पर जमकर सियासत भी हुए। तमाम पक्षों ने इस पर अपनी अपनी राय रखी थीं। महाकुंभ के बाद अब केदारनाथ धाम में भी गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग हो रही है। बता दें कि साल 2025 में धामों के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो गया है। इस बार केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खुलेंगे। तो वहीं बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। वहीं, 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट दर्शन के लिए खोले दिए जाएंगे।
हरीश रावत ने दी प्रतिक्रिया
बीजेपी विधायक के इस बयान पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब भी बाढ़ के दौरान ऐसे मुद्दे सामने आए थे, और हमने उचित कार्रवाई की थी। अगर अब भी ऐसा कुछ है, तो इसे बिना हंगामा किए हल किया जाना चाहिए। हरीश रावत ने कहा कि यह मामला मुख्यमंत्री स्तर का नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वे इस पर जांच करें और उचित कार्रवाई करें।