2026-07-13 17:37:39
नई दिल्ली/ भव्य खबर। रेलवे के एसी कोच में सफर करने वाले वीआईपी कंबल, चादर, तकिया चुरा रहे हैं. पिछले चार साल की सभी चोरियां जोड़ लें तो इसकी वजह से रेलवे को 100 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा का नुकसान हुआ है. किस डिवीजन में सबसे ज्यादा क्या चोरी होता है? भारतीय रेलवे के एयर-कंडीशंड (AC) कोच में सफर करने वाले यात्रियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक आरटीआई (RTI) से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच ट्रेनों के एसी कोच से करीब 1.27 करोड़ बेडरोल के सामान (चादर, तौलिया, कंबल और तकिया) गायब हो चुके हैं. इस बड़े पैमाने पर हुई चोरी के कारण रेलवे और बेडरोल सप्लाई करने वाले ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपये से भी अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है.आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि रेलवे के वीआईपी और संपन्न समझे जाने वाले यात्रियों में से हर 1,000 यात्रियों में से एक यात्री अपने साथ बेडरोल का कोई न कोई सामान चोरी करके ले जा रहा है. देश भर के 69 रेलवे डिवीजनों में से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2022 के मुकाबले 2025 तक चोरी की इन घटनाओं में 56 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है.
किस डिवीजन में हुई सबसे ज्यादा चोरी?
आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में बीकानेर डिवीजन चोरी के मामलों में सबसे आगे रहा है. इस अकेले डिवीजन से पिछले चार सालों में रिकॉर्ड 25.76 लाख बेडरोल आइटम गायब हुए हैं, जिसमें 2022 के बाद से चार गुना की बढ़ोतरी देखी गई है. इसके उलट दिल्ली डिवीजन ने बेहतर निगरानी के जरिए चोरी की घटनाओं में 79 प्रतिशत तक की कमी लाने में सफलता पाई है, जबकि दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ डिवीजन में चोरी का एक भी मामला सामने नहीं आया है.
सबसे ज्यादा क्या चोरी होता है?
यात्रियों द्वारा चुराए जाने वाले सामानों में सबसे ऊपर फेस टॉवल (छोटा तौलिया) है. राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा करीब 46.54 लाख फेस टॉवल चोरी किए गए हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा चादरें (बेडशीट) गायब हुई हैं, जिनकी संख्या 41 लाख से भी अधिक है. इसके अलावा लाखों की संख्या में तकिए के कवर, कंबल और तकिए भी गायब पाए गए हैं.
गरीब कर्मचारियों पर गिरती है गाज
रेलवे नियमों के मुताबिक, यात्रा के दौरान मिलने वाली यह सुविधाएं सिर्फ ट्रेन में इस्तेमाल के लिए होती हैं. आमतौर पर यात्रियों के उतरने के बाद कोच अटेंडेंट इन सामानों को इकट्ठा करते हैं. ठेकेदारों को होने वाले इस भारी नुकसान की भरपाई अक्सर उन गरीब ट्रेन अटेंडेंट्स की सैलरी से पैसे काटकर की जाती है, जो रोजाना महज कुछ सौ रुपये की दिहाड़ी पर काम करते हैं. रेलवे अब इस तरह की चोरियों को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।