बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक राजनाथ सिंह करेंगे भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल 2026 को शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
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2026-04-27 14:35:58

नई दिल्ली / भव्य खबर ।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह महत्वपूर्ण बैठक बिश्केक, किर्गिस्तान में आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस बैठक में रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-रोधी रणनीतियों और सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर रहेगा। एससीओ जैसे मंच पर इन विषयों की चर्चा वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पश्चिम एशिया की स्थिति की पृष्ठभूमि: इस वर्ष की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे परिदृश्य में SCO सदस्य देश इस संकट के प्रभाव को कम करने के उपायों पर भी विचार कर सकते हैं।

भारत का रुख: आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश: बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत की ओर से वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएंगे। साथ ही वे आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ भारत की ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति को मजबूती से प्रस्तुत करेंगे।

द्विपक्षीय वार्ताओं की भी संभावना: बैठक के दौरान राजनाथ सिंह अन्य भागीदार देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

एससीओ का महत्व और भारत की भूमिका: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई, चीन में हुई थी। यह संगठन दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक समूहों में से एक है, जिसमें भारत, रूस, चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस जैसे देश शामिल हैं।भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना और 2023 में इसकी घूर्णन अध्यक्षता भी संभाली। एससीओ में भारत की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और बहुपक्षीय कूटनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

निष्कर्ष: बिश्केक में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में महत्वपूर्ण बन जाती है जब दुनिया कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत, अपने स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण के साथ, वैश्विक शांति और सहयोग को मजबूत करने में एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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