दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों में जमा हुए 41 टन से अधिक पुराने कपड़े

जनवरी 2027 में 10 और केंद्र खोलने की तैयारी, पुराने कपड़ों से बन रहे रग, बैग और अन्य उपयोगी उत्पाद
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2026-09-14 00:38:00

नई दिल्ली / भव्य खबर । कपड़ों के उचित निपटान और पुनः उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं। 31 अगस्त तक दिल्ली मेट्रो के 10 अर्पण केंद्रों पर 3,940 लोगों ने 41,181.59 किलोग्राम पुराने कपड़े जमा कराए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे पुराने कपड़ों के बेहतर उपयोग और रीसाइक्लिंग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

10 अर्पण केंद्रों पर 41 टन से अधिक कपड़े जमा

सबसे अधिक 9,861.40 किलोग्राम कपड़े डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल केंद्र पर जमा हुए, जबकि शालीमार बाग केंद्र पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। पंजाबी बाग पश्चिम में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए। मयूर विहार-1, हौज खास, द्वारका-ककरोला, मालवीय नगर, लाजपत नगर और मोहन एस्टेट केंद्रों पर भी लोगों ने पुराने कपड़े जमा कराए हैं।

पुराने कपड़ों से बन रहे उपयोगी उत्पाद

अर्पण केंद्रों पर जमा कपड़ों को पुनः उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के लिए अलग किया जा रहा है। करीब 4,266 किलोग्राम सामग्री को पुनः उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए, जबकि 29,424 किलोग्राम सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया है। स्वयं सहायता समूहों की मदद से इन कपड़ों से रग, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

तैयार उत्पादों की बिक्री, 10 और केंद्र खुलेंगे

पुराने कपड़ों से तैयार उत्पादों की बिक्री भी अर्पण केंद्रों पर की जा रही है। अब तक इन केंद्रों से 27,036 रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। दिल्ली मेट्रो की इस पहल का विस्तार करते हुए जनवरी 2027 में मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार पश्चिम, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी पश्चिम, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर-10 और छतरपुर समेत 10 नए अर्पण केंद्र प्रस्तावित हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथ उन्हें दोबारा उपयोग और रीसाइक्लिंग के जरिए उपयोगी उत्पादों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों की भागीदारी से इस व्यवस्था को और व्यापक बनाकर दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने के प्रयासों को मजबूती दी जा सकती है।

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