2026-02-26 17:42:18
नई दिल्ली/ भव्य खबर। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उच्च जातियों के विकास के लिए गठित राज्य आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात कर बिहार के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात राष्ट्रीय राजधानी में हुई जहां दोनों नेताओं के बीच राज्य की वर्तमान परिस्थितियों, विकास परियोजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। राजीव रंजन प्रसाद, जो जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के साथ-साथ उच्च जातियों के विकास के लिए गठित राज्य आयोग के उपाध्यक्ष भी हैं ने बिहार में सामाजिक संतुलन, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष रणनीतिक सहयोग और केंद्र राज्य समन्वय की आवश्यकता है ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके। बैठक के दौरान उद्योग, निवेश, कृषि आधुनिकीकरण, युवा कौशल विकास तथा शहरी आधारभूत संरचना को लेकर विशेष चर्चा हुई। राजीव रंजन प्रसाद ने राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा करते हुए कहा कि बिहार में औद्योगिक निवेश की अपार संभावनाएं हैं और इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के समावेशी विकास के बिना राज्य की प्रगति अधूरी रहेगी। नितिन नवीन ने बिहार के विकास प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने बीते वर्षों में बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया और आश्वस्त किया कि बिहार के विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी नीतिगत पहलों और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में समन्वित प्रयासों पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से संतुलित राज्य बनाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात राज्य की विकास राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत देती है। बिहार में आगामी राजनीतिक और विकासात्मक गतिविधियों के बीच इस तरह की उच्चस्तरीय चर्चाएं भविष्य की रणनीति तय करने में निणर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।