2026-04-27 20:03:09
चंडीगढ़ / भव्य खबर । हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘हरियाणा लिपिकीय सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) विधेयक, 2026’ को सदन में पारित कर दिया गया। यह विधेयक मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे सदन की मंजूरी मिलते ही राज्य के हजारों कर्मचारियों के लिए नई उम्मीदें जगी हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) कर्मचारियों के लिए पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को समयबद्ध और समान अवसर प्रदान करना है, ताकि उनकी कार्यक्षमता और मनोबल दोनों में वृद्धि हो सके।
पदोन्नति कोटा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इस विधेयक के तहत सबसे बड़ा बदलाव चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति कोटा में किया गया है। अब तक 20 प्रतिशत का जो कोटा निर्धारित था, उसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लिपिक (क्लर्क) पद पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा, जो पहले सीमित पदों के कारण संभव नहीं हो पाता था।
कॉमन कैडर से बढ़ेंगे अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2018 में लागू ‘हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) अधिनियम’ के तहत कॉमन कैडर व्यवस्था शुरू की गई थी। इस व्यवस्था ने विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के अवसरों को व्यापक बनाया। पहले कर्मचारियों को केवल अपने विभाग तक सीमित रहना पड़ता था, जिससे उनकी प्रगति बाधित होती थी। अब कॉमन कैडर के माध्यम से कर्मचारियों को राज्य स्तर पर अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी योग्यता के अनुसार पदोन्नति संभव हो सकेगी।
लंबा इंतजार अब होगा कम
मुख्यमंत्री सैनी ने यह भी बताया कि पहले कई कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए 10 से 15 वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था, बढ़े हुए कोटा और सरल प्रक्रिया के कारण अब यह इंतजार काफी कम हो जाएगा। इससे कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति मिलने की संभावना बढ़ेगी और प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार आएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह विधेयक न केवल कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को भी और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रेरित और संतुष्ट कर्मचारी ही बेहतर शासन का आधार होते हैं।
विपक्ष पर भी टिप्पणी
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विपक्ष इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग लेता, तो राज्य के कर्मचारियों के हित में एक व्यापक सहमति बन सकती थी। बावजूद इसके, उन्होंने दोहराया कि सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नई उम्मीदों की शुरुआत
‘हरियाणा लिपिकीय सेवा विधेयक, 2026’ के पारित होने से राज्य के हजारों ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। यह कदम न केवल उनके करियर को नई दिशा देगा, बल्कि शासन प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी, प्रभावी और उत्तरदायी बनाएगा।