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बिहार दिवस 2025 इतिहास, महत्व और उत्सव

बिहार की स्थापना के 113 साल पूरे हो गए। बिहार दिवस के आयोजन को लेकर राजधानी का ऐतिहासिक गांधी मैदान पूरी तरह सजकर तैयार है। इस वर्ष बिहार दिवस का आयोजन व्यापक और भव्य तरीके से आयोजित किया जा रहा है।
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2025-03-22 15:04:19

पटना/ भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव। आज बिहार की स्थापना के 113 साल पूरे हो गए। बिहार दिवस के आयोजन को लेकर राजधानी का ऐतिहासिक गांधी मैदान पूरी तरह सजकर तैयार है। इस वर्ष बिहार दिवस का आयोजन व्यापक और भव्य तरीके से आयोजित किया जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 10 गुणा अधिक क्षेत्रफल यानी 1 लाख 25 हजार वर्ग फीट में इसका आयोजन किया जा रहा है। थीम उन्नत बिहार-विकसित बिहार रखा गया है। यह भव्य महोत्सव 26 मार्च तक चलेगा, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। शिक्षा विभाग इसका नोडल विभाग है और उसके स्तर से इस महोत्सव के लिए व्यापक तैयारी की गई है। यह आयोजन आम जनता के लिए पूरी तरह से मुफ्त रहेगा। सरकारी योजनाओं की जानकारी और प्रदर्शनी के लिए विभिन्न विभागों की तरफ से स्टॉल भी लगाए गए हैं। 22 से 24 मार्च तक विभिन्न स्टॉलों पर छात्र-छात्राओं की तरफ से बनाए गए मॉडल, चित्रकला प्रतियोगिता में पुरस्कृत चित्रों की प्रदर्शनी तथा शिक्षकों के निर्मित शिक्षण लर्निंग सामग्री (टीएलएम) का प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में स्थानीय जनसहभागिता को प्रोत्साहित किया गया है। ताकि अधिक से अधिक लोग शिक्षा प्रणाली में हो रहे नवाचारों को समझ सकें। स्वास्थ्य विभाग 22 और 23 मार्च को 15 मुफ्त हेल्थ स्टॉल लगाएगा। इन स्टॉलों पर शुगर टेस्ट, विशेषज्ञ परामर्श, एचपीवी वैक्सीन की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, 12 बीमारियों से बचाव हेतु टीकाकरण काउंटर भी स्थापित किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन की देखरेख सिविल सर्जन और 11 सीनियर डॉक्टरों की टीम द्वारा की जाएगी। बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए महाबोधि मंदिर, नालंदा विश्वविद्यालय, विश्व शांति स्तूप, तख्त श्रीहरिमंदिर पटना साहिब जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की थ्री-डी प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी। इसका वर्चुअल माध्यम से सामान्य लोग भी आनंद ले सकेंगे। साथ ही एक पर्यटन सूचना केंद्र भी स्थापित होगा, जहां निवेश और पर्यटन नीति की जानकारी दी जाएगी। इस आयोजन में हथकरघा, हस्तशिल्प, चमड़ा, जूट और लाह उद्योगों से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी भी होगी। यह पहल स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और निवेशकों को जोड़कर बिहार के पारंपरिक उद्योगों के विकास और विस्तार को प्रोत्साहित करने का कार्य करेगी। राज्य सरकार की प्रमुख विकास योजनाओं, उपलब्धियों, आइकॉनिक भवनों और पर्यटक स्थलों की जानकारी प्रदान करने के लिए सूचना विभाग की ओर से विशेष स्टैंडीज लगाए गए हैं। इसके साथ ही, लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विभाग की तरफ से नुक्कड़ नाटकों का भी आयोजन किया जाएगा। समारोह में आने वालों के लिए सेल्फी पॉइंट की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें मरीन ड्राइव पर विशेष रूप से एक आकर्षक सेल्फी पॉइंट बनाया गया है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग गांधी मैदान में एक विशेष स्टॉल लगाएगा, जहां विभाग की उपलब्धियों, कार्यप्रणाली और भविष्य की योजनाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ललित कला भवन में दिव्यांग बच्चों के लिए पेंटिंग कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें पटना के विभिन्न विद्यालयों के छात्र भाग लेंगे। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल, गांधी मैदान, रवींद्र भवन और प्रेमचंद रंगशाला में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रेमचंद रंगशाला में विशेष रूप से महिला थीम पर आधारित नाट्य उत्सव होगा, जिसमें सभी पात्र महिलाएं होंगी। इसके साथ ही, नुक्कड़ नाटकों का भी मंचन किया जाएगा। बिहार दिवस समारोह के मद्देनजर सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पटना के गांधी मैदान में मॉर्निंग और इवनिंग वॉक पर रोक लगा दी गई है। इसके अतिरिक्त, अन्य प्रयोजनों के लिए भी 24 मार्च तक प्रतिबंध लागू रहेगा। बिहार के अद्भुत हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य परंपरागत उत्पादों की झलक भी देखने को मिलेगी। स्टॉलों में हथकरघा और वस्त्र, बुनकरी, खादी के साथ हस्तशिल्प एवं चित्रकला जैसे मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा पेंटिंग, टिकुली पेंटिंग, मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके साथ ही हस्तनिर्मित शिल्प जैसे सिक्की कला, पेपर कढ़ाई, पेपर माचे, टेरा कोटा, के साथ अन्य चीजें प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें सूखे घास से बनी सुंदर और आकर्षक कलाकृतियां, सुजनी कढ़ाई जिसमें सूती कपड़ों पर बारीक हाथ की कढ़ाई से बनी पारंपरिक कलाकृति, पेपर माचे जिसके अंतर्गत हाथों से बने कागज की लुगदी से निर्मित आकर्षक कलात्मक उत्पाद के साथ ही मिट्टी से बने सजावटी और उपयोगी उत्पाद, जो बिहार की समृद्ध कुम्हार परंपरा को दर्शाते हैं, प्रदर्शित होंगी। बांस और बेंत शिल्प पर्यावरण अनुकूल और मजबूत हस्तशिल्प, जिसमें टोकरियां, फर्नीचर और सजावटी वस्तुएं शामिल हैं, इनका भी प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा हथकरघा और वस्त्र में विविंग (बुनकरी) से बिहार के पारंपरिक हथकरघा वस्त्र जैसे भागलपुरी सिल्क, तसर सिल्क, कोसा सिल्क और खूबसूरत सूती वस्त्रों का अनूठा संग्रह दर्शाया जाएगा। खादी वस्त्रों की बेहतरीन श्रृंखला का प्रदर्शन होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंख्ला में अधिकारियों की भी प्रस्तुति भी खास रहेगी। बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के डीजी आलोक राज का गायन 23 मार्च को श्रीकृष्ण मेमोरियाल हॉल में शाम 6 बजे से होगा। जबकि, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी का भरतनाट्यम 22 मार्च को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शाम 7 बजे और आईएएस नीलम चौधरी का कथक 23 मार्च को शाम 7 बजे से आयोजित होगा। बिहार दिवस, जिसे बिहार स्थापना दिवस भी कहा जाता है, हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन 1912 में बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में स्थापित किए जाने की स्मृति में मनाया जाता है। बिहार का इतिहास, संस्कृति और परंपराएं अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण हैं, जो इसे भारत के प्रमुख राज्यों में से एक बनाती हैं। इतिहास बिहार का इतिहास प्राचीन काल से ही गौरवशाली रहा है। यह क्षेत्र वैदिक काल में ‘विहार’ या ‘विहारक’ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है ‘मठों की भूमि’। इस भूमि ने अनेक महान साम्राज्यों को जन्म दिया, जिनमें मौर्य, गुप्त, और पाल वंश प्रमुख हैं। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य और उनके प्रधानमंत्री आचार्य चाणक्य ने मगध क्षेत्र से ही अपने साम्राज्य का विस्तार किया। सम्राट अशोक, जिन्हें विश्व में शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, ने भी यहीं से शासन किया। उनके शासनकाल में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रसार हुआ और बिहार बौद्ध शिक्षा का केंद्र बना। शैक्षणिक और सांस्कृतिक धरोहर बिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां स्थित नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय प्राचीन काल में उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे, जहां विश्वभर से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय विशेष रूप से बौद्ध अध्ययन के लिए प्रसिद्ध था और इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। सांस्कृतिक दृष्टि से, बिहार की भूमि ने मैथिली, भोजपुरी, मगही जैसी समृद्ध भाषाओं और साहित्य को जन्म दिया है। मधुबनी पेंटिंग, जो मिथिला क्षेत्र की विशेषता है, अपनी जटिल डिजाइन और जीवंत रंगों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक महत्व बिहार विभिन्न धर्मों का संगम स्थल रहा है। यहां बोधगया में महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिससे यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए तीर्थस्थल बन गया। राजगीर, जो प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व का संगम है, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां स्थित विश्व शांति स्तूप शांति का प्रतीक है। इसके अलावा, बिहार में सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्मस्थान पटना साहिब स्थित है, जो सिख समुदाय के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान बिहार का स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1857 के सिपाही विद्रोह में बाबू वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और उन्हें पराजित किया। इसके अलावा, चंपारण सत्याग्रह, जो महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1917 में हुआ, ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी। बिहार दिवस का आयोजन इस अवसर पर राज्य भर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, सेमिनार, और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, और उपलब्धियों को प्रदर्शित करना होता है। इस दिन सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बिहार दिवस न केवल राज्य के गठन का उत्सव है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास, और विकास की यात्रा का भी प्रतीक है। यह दिन बिहारवासियों के लिए गर्व का अवसर होता है, जब वे अपने राज्य की उपलब्धियों को याद करते हैं और भविष्य के लिए नए संकल्प लेते हैं। प्रमुख पर्यटन स्थल बिहार में कई प्रमुख पर्यटन स्थल हैं जो इसकी समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं: महाबोधि मंदिर, बोधगया: यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहां महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। नालंदा विश्वविद्यालय: प्राचीन भारत का यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। राजगीर: यहां स्थित विश्व शांति स्तूप और गर्म पानी के झरने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। वैशाली: यह स्थान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि है। पटना साहिब: सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्मस्थान। सांस्कृतिक विविधता बिहार की सांस्कृतिक विविधता उसके त्योहारों, नृत्य, संगीत, और कला में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यहां के प्रमुख त्योहारों में छठ पूजा, मकर संक्रांति, होली, और दशहरा शामिल हैं। छठ पूजा विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है और इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। नृत्य और संगीत में, बिहार की समृद्ध परंपरा है। यहां का ‘झिझिया’ नृत्य और ‘समाचकेवा’ लोकनृत्य विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, भोजपुरी और मैथिली संगीत भारत के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय हैं। बिहार की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति हाल के वर्षों में, बिहार ने आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र में भी प्रगति की है। कृषि इस राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, जिसमें धान, गेहूं, गन्ना, और मक्का की खेती प्रमुख है। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। बिहार में अब विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, कपड़ा उद्योग, और अन्य छोटे एवं मध्यम उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। बिहार दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक उपलब्धियों का उत्सव है। यह दिन हमें बिहार की गौरवशाली परंपरा और संघर्षों की याद दिलाता है और हमें एक उज्ज्वल भविष्य की दिशा में प्रेरित करता है। बिहारवासियों के लिए यह एक ऐसा अवसर है, जब वे अपने राज्य की समृद्धि और विकास में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध होते हैं। बिहार दिवस का उत्सव हमें एकता, सहयोग और राज्य के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देता है। यह दिन बिहार की पहचान को और मजबूत करता है और हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।

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