2025-03-15 17:54:34
चंडीगढ़/ भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव । हरियाणा सरकार की तरफ से स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने के लिए एक नई व्यवस्था की गई है. विद्यालयों में टीचरों की संख्या को सही ढंग से व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने रेशनलाइजेशन (संशोधन) किया है. अब सरकार गैर-शिक्षकीय यानि जो पढ़ाते नहीं हैं उन कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी कर रही है. इसी वजह से मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी है कि वहां कितने गैर-शिक्षकीय कर्मचारी काम कर रहे हैं. इसके बाद पांच हजार से अधिक पद समाप्त किए जा सकते हैं. जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा भेजने के लिए निर्देशित किया गया है. शिक्षा निदेशालय की तरफ से एससीइआरटी गुरुग्राम और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की लिस्ट मांगी गई है. एचआरएमई-1 और एचआरएमई-2 ब्रांच से संबंधित अधीक्षक, उप अधीक्षक, सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, स्टेनो टाइपिस्ट, सहायक, सांख्यिकी सत्ययक, ड्राइवर, लैब अटेंडेंट और लिपिक की जानकारी देने को कहा जा चुका है. अगर इस बारे में बात करें कि राशनलाइजेशन क्या होता है तो बता दें कि हरियाणा शिक्षा विभाग में रेशनेलाइजेशन का अर्थ है शिक्षकों और छात्रों के अनुपात को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों में शिक्षकों के पदों का पुनर्वितरण करना, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो पाये. रेशनेलाइजेशन का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक मौजूद हों, जिससे शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार हो सके. हरियाणा सरकार की तरफ से हाल ही में सरकारी विभागों में पदों के रेशनेलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिसकी शुरुआत शिक्षा विभाग से की गयी है. इसमें जेबीटी, पीआरटी और मुख्य शिक्षकों के पदों को स्कूलों की संख्या और छात्रों की संख्या के अनुसार समायोजित किया जाता है. हरियाणा सरकार ने रेशनेलाइजेशन में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 रखने का फैसला लिया है. कुछ मामलों में, रूल्स में ढील देकर मुख्य शिक्षक कों डेढ़ सौ से कम छात्रों पर भी नियुक्ति दी जा सकती है.