2026-04-27 15:38:11
रुद्राष्टकम के आरंभ में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, हे ईशान। मैं मुक्तिस्वरूप, समर्थ, सर्वव्यापक, ब्रह्म, वेदस्वरूप, निज स्वरूप में स्थित, निर्गुण, निर्विकल्प, निरीह, अनंत ज्ञानमय और आकाश के समान सर्वत्र व्याप्त प्रभु को प्रणाम करता हूं। कुछ-कुछ इसी भाव से हम लोग चारधाम की यात्रा करते हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धामों की यह यात्रा इस वर्ष भी हर्षोल्लास के साथ आरंभ हो रही है। हजारों वर्षों से हम लोग इसे मोक्ष प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग मानते रहे हैं। यह न केवल आत्मा की शुद्धि और पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि शिव और शक्ति के साक्षात दर्शन का अवसर भी प्रदान करती है, क्योंकि इसी क्षेत्र में शक्ति स्वरूपा गंगा और यमुना धरती पर अवतरित होती हैं और हमारे त्रिदेवों में से दो-भगवान विष्णु और महादेव शिव के अधिवास भी यहीं हैं। यह यात्रा समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाती है, जिससे सामूहिक आध्यात्मिक संस्कृति पनपती है।
माना जाता है कि इस यात्रा के बाद हम जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। जो लोग मुक्ति नहीं चाहते, वे भी आस्था, श्रद्धा, साधना और स्वयं के शोधन के लिए यह यात्रा करते हैं। हम जानते हैं कि यात्रा-मार्ग अत्यंत कठिन हैं, ये तीर्थ ऊंची पहाड़ियों पर स्थित हैं। आज तो फिर भी बहुत-सी सुविधाएं हो गई हैं, लेकिन हमारे पूर्वज जिन कठिनाइयों के साथ ये यात्रा करते थे, उनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि भगवान को पाने का मार्ग आसान नहीं होता। इसलिए तीर्थ यात्री तमाम कष्टों को झेलते हुए भी खुशी-खुशी यह यात्रा करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि इस यात्रा के बाद वे एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाएंगे।
चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। इसी के साथ हजारों-हजार देसी-विदेशी तीर्थयात्रियों का आना भी शुरू हो गया है। उत्तराखंड चूंकि एक पहाड़ी प्रदेश है, इसलिए यहां आपदा की आशंकाएं हमेशा मंडराती रहती हैं। रास्ते संकरे हैं। पहाड़ बेहद नाजुक हैं, इसलिए मैदानों की तरह सड़कें ज्यादा चौड़ी नहीं हैं। उनकी बहन क्षमता भी सीमित होती है। यहां का पर्यावरण और जैव-विविधता भी नाजुक हैं। देश और समाज के दुश्मनों की बुरी निगाहें भी निरंतर बढ़ती रही हैं। जबकि जैसे-जैसे लोगों में अपने धार्मिक स्थलों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है, साल दर साल तीर्थ यात्रियों की संख्या भी बढ़ रही है। इसलिए हमारे लिए इसका आयोजन लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इन्हीं चुनौतियों के मद्देनजर हमने पिछले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और सुविधा के स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। हमारा मुख्य फोकस सुगम और सुरक्षित यात्रा पर है। 2013 में आई आपदा के बाद यात्रियों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इससे प्रशासन को यह पता रहता है कि किस धाम में कितने यात्री हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए रिस्टबैंड या टोकन सिस्टम का उपयोग किया गया है, ताकि आपात स्थिति में उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सके। यात्रियों के लिए स्वास्थ्य और पहचान संबंधी जानकारी वाले कार्ड्स की सुविधा शुरू की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी जी का देवभूमि के प्रति विशेष लगाव रहा है। इसलिए उन्होंने उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए विशेष बुनियादी ढांचा स्वीकृत किया। लगभग 889 किमी के आल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत लंबी सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया है, ताकि भूस्खलन के दौरान भी रास्ते जल्द से जल्द खुल सकें और साल भर कनेक्टिविटी बनी रहे। केदारनाथ और बदरीनाथ के लिए कई जगहों से हेलीकाप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं। बुकिंग को अब आइआरसीटीसी के माध्यम से एकीकृत किया गया है, ताकि किसी तरह की घपलेबाजी न हो। ऊंचाई पर होने वाली स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों (जैसे आक्सीजन की कमी) से निपटने के लिए रास्तों में जगह-जगह एसी मेडिकल रिलीफ सेंटर और आक्सीजन पार्लर खोले गए हैं। स्वच्छ भारत के तहत धामों में कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक शौचालयों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है। पूरे चारधाम मार्ग पर खाने-पीने और रहने की प्रचुर सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार के गेस्ट हाउसों का भी आधुनिकीकरण किया गया है और टेंट सिटी की व्यवस्था इस बार और भी बेहतर की गई है। चारधाम यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी के लिए विभिन्न जगहों पर चेकपोस्ट बनाए गए हैं। प्रत्येक 10 किलोमीटर पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की चौबीसों घंटे तैनाती रहेगी। बदरीनाथ और केदारनाथ धामों के महत्व और बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी के आशीर्वाद से पुनर्नवीकरण प्लान बना है। दोनों ही तीर्थों के लिए मास्टरप्लान बनाए गए हैं, ताकि आने वाले 50 वर्षों के अनुमान पर आधारित विकास हो। इसमें चौड़े घाट, पुजारियों के लिए नए आवास और मंदिर के चारों और एक सुरक्षित और खुला परिसर बनाया गया है। दोनों ही स्थानों पर दो नए अस्पताल बनाए गए हैं।
देवताओं की भूमि उत्तराखंड में सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। यात्रा के दौरान कृपया निर्धारित नियमों का पालन करें और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस पवित्र तीर्थयात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सक्रिय योगदान दें।
लेखक: पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड)