सद्भाव यात्रा में शामिल होकर क्या पार्टी के बीच के सद्भाव को राहुल गांधी बना पाएंगे?

बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा को आज मिलेगी नई ताकत, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज आएंगे हरियाणा।
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2026-05-08 01:37:47

हरियाणा / भव्य खबर । बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा को आज मिलेगी नई ताकत, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज आएंगे हरियाणा। गुरुग्राम के सब्ज़ी मंडी हरि नगर से एसडी स्कूल खांडसा रोड तक करेंगे सद्भाव यात्रा में शिरकत। यात्रा के बाद एसडी स्कूल, खांडसा रोड पर जनसभा को करेंगे संबोधित। आज की सद्भाव यात्रा के लिए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के द्वारा आदेश पत्र जारी कर सभी को मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। सद्भाव यात्रा शाम 4:30 बजे शुरू होगी और शाम 5:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे राहुल गांधी।

सद्भाव यात्रा

बृजेंद्र सिंह ने सद्भाव यात्रा 5 अक्टूबर 2025 को शुरू की थी। इस यात्रा की शुरुआत जींद ज़िले के नरवाना विधानसभा क्षेत्र के डनौदा गाँव से हुई थी। बृजेंद्र सर छोटू राम के परपोते हैं, इसलिए डनौदा जैसा जाट-बहुल क्षेत्र उनके पारिवारिक और राजनीतिक प्रभाव का केंद्र है।

यात्रा की योजना शुरू से ही हरियाणा के सभी 90 विधानसभा हलकों में जाने और लोगों से जुड़ने की थी। पहला चरण जींद-हिसार-भिवानी बेल्ट के 14 हलकों से शुरू हुआ, जिसमें नरवाना, कलायत, सफीदों, जींद, जुलाना, नारनौंद, उचाना, उकलाना जैसे क्षेत्र शामिल थे। दूसरा चरण नांगल चौधरी से शुरू होकर महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी की तरफ़ गया, जिसे बृजेंद्र ने यात्रा का असली इम्तिहान कहा क्योंकि वहाँ कांग्रेस का आधार कमज़ोर है। इसके बाद यात्रा अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और कैथल से होते हुए आगे बढ़ी। आज की तारीख़ तक यात्रा लगभग 81 हलकों को कवर कर चुकी है, और सिर्फ़ गुरुग्राम के 5, झज्जर के 2 और रोहतक के 2 हलके बाक़ी बचे हैं।

यह यात्रा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से प्रेरित है, पर पैमाने में छोटी और हरियाणा तक सीमित है। हालाँकि इस यात्रा के दौरान बृजेंद्र सिंह का स्टाइल भी खूब चर्चे में है, क्योंकि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के स्टाइल की तरह ही बृजेंद्र सिंह का स्टाइल इन दिनों लग रहा है।

यात्रा का उद्देश्य

इस यात्रा के शुरू होने से पहले से लेकर अब तक यात्रा के उद्देश्य को लेकर बृजेंद्र सिंह स्पष्टता से बोलते हुए नज़र आए हैं। वहीं इस पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश में बीजेपी सरकार के काम को लेकर सवाल उठाए, और सरकार को हाईवे से उतर कर हलकों की सड़कों पर चलने का सुझाव दिया।

उद्देश्य:

समाज में भाईचारा और सद्भाव बढ़ाना, क्योंकि बृजेंद्र का आरोप है कि बीजेपी की राजनीति ने हरियाणा में जाति, क्षेत्र और सम्प्रदाय के आधार पर बँटवारा बढ़ाया है।

2024 विधानसभा हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जो निराशा और ख़ामोशी आ गई थी उसे तोड़ना और पार्टी को फिर से ज़मीन पर सक्रिय करना।

किसानों की मुसीबतें, युवाओं की बेरोज़गारी और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे ज़मीनी मुद्दे उठाना।

प्रदेश कांग्रेस पार्टी के नेताओं की यात्रा में भागीदारी

इस यात्रा के शुरू होने से पहले से ही यह यात्रा सुर्ख़ियों में रही है, अपनी यात्रा से ज़्यादा कांग्रेस की एकजुटता को लेकर। एक ओर जहाँ बृजेंद्र सिंह के द्वारा इस यात्रा को कांग्रेस पार्टी की यात्रा और पार्टी के संगठन को मज़बूत करने की यात्रा का दावा किया गया है, वहीं भूपिंदर हुड्डा समेत उनके गुट के नेताओं के द्वारा इसे व्यक्तिगत यात्रा बताया गया है। यही कारण है कि यह यात्रा प्रदेश के दिग्गजों की मौजूदगी से महरूम रही। लगभग पूरी होने जा रही इस यात्रा में गिनती के प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस यात्रा में अगर हरियाणा के दिग्गज नेताओं की बात की जाए तो केवल कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला और कैप्टन अजय सिंह यादव के नाम शामिल हैं। वहीं इनके अलावा लगभग 12 ज़िला अध्यक्षों ने अपने-अपने ज़िलों में यात्रा की अगुवाई की। हालाँकि कुल 32 ज़िला अध्यक्षों में से 12 का खुलकर साथ देना, उस माहौल में जहाँ राज्य नेतृत्व दूरी बनाए हुए था, बृजेंद्र सिंह के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। मगर अब राहुल गांधी का खुद इस यात्रा में आना, वहीं अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मौजूद रहना, प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा सभी की मौजूदगी अनिवार्य करना, इस यात्रा को बेशक बल देता है और इसे बृजेंद्र सिंह का पार्टी में कद बढ़ना माना जा सकता है, कम से कम बृजेंद्र सिंह के समर्थकों के बीच।

आज की यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है, परन्तु दिलचस्प भी कि आख़िर यात्रा और रोडशो में कौन-कौन मौजूद रहते हैं। क्योंकि निर्देश तो पीसीसी के द्वारा सभी को मौजूद रहने के दिए गए है, मगर जिनका दावा था कि इस यात्रा में हम शामिल नहीं होंगे क्योंकि यह यात्रा व्यक्तिगत है, क्या शीर्ष नेतृत्व के आने से अब यह यात्रा पार्टी की हो जाएगी? और अगर सभी दिग्गज नेता यात्रा में मौजूद रहते हैं तो सवाल आगे की यात्रा पर भी उठता है कि बाक़ी के बचे हलके, ख़ास तौर पर भूपिंदर सिंह हुड्डा के विधानसभा क्षेत्र में जब यह यात्रा जाएगी, तो क्या उनका सहयोग मिलेगा, या यह यात्रा केवल राहुल गांधी तक ही पार्टी की यात्रा कहलाएगी।

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