2026-04-10 12:42:56
दिल्लीभव्य खबर।
राज्यसभा की राजनीति में एक बार फिर हरिवंश नारायण सिंह चर्चा में हैं। वे पहले 2018 से 2024 तक राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं। अब उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मनोनीत सदस्य बनाया गया है। ऐसे में यदि राजनीतिक सहमति बनती है, तो वे एक बार फिर उपसभापति पद संभाल सकते हैं।
हरिवंश नारायण सिंह ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी, जिसके बाद वे राजनीति में आए। जनता दल (यू) के प्रतिनिधि के रूप में वे राज्यसभा पहुंचे और 2018 में पहली बार उपसभापति चुने गए। इसके बाद 2020 में उन्हें दोबारा इस पद के लिए चुना गया।
बजट सत्र के दौरान 18 मार्च को राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों के विदाई समारोह में प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने उनके काम की सराहना की थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हरिवंश नारायण सिंह की सार्वजनिक जीवन में भूमिका अभी समाप्त नहीं हुई है और वे आगे भी जनहित में कार्य करते रहेंगे।
संविधान के अनुसार, राज्यसभा का उपसभापति सदन के सदस्यों में से चुना जाता है। इस पद के लिए मनोनीत और निर्वाचित—दोनों प्रकार के सदस्य पात्र होते हैं। चुनाव के लिए प्रस्ताव लाया जाता है, जिस पर मतदान होता है और साधारण बहुमत के आधार पर उपसभापति का चयन किया जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। यह सीट पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद खाली हुई थी। 69 वर्षीय हरिवंश अब 2032 तक राज्यसभा के सदस्य रहेंगे।
राज्यसभा में कुल 12 मनोनीत सदस्य होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा में कौन-सी जिम्मेदारी सौंपी जाती है।