2026-02-03 11:56:11
सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला भारत की एवं शिल्पियों की हस्तकला का १५ दिन चलने वाला मेला लोगों को ग्रामीण माहौल और ग्रामीण संस्कृति का परिचय देता है। यह मेला हरियाणा राज्य के फरीदाबाद शहर के दिल्ली के निकटवर्ती सीमा से लगे सूरजकुंड क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगता है। यह मेला दशक से आयोजित होता आ रहा है। वर्तमान में इस मेले में हस्तशिल्पी और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों की वस्त्र परंपरा, लोक कला, लोक व्यंजनों के अतिरिक्त लोक संगीत और लोक नृत्यों का भी संगम होता है। इस मेले में हर वर्ष किसी एक राज्य को थीम बना कर उसकी कला, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाता है। मेले में लगे स्टॉल हर क्षेत्र की कला से परिचित कराते हैं। विदेशी कलाशिल्पी भी यहां आते हैं। पश्चिम बंगाल और असम के बांस और बेंत की वस्तुएं, पूर्वोत्तर राज्यों के वस्त्र, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से लोहे व अन्य धातु की वस्तुएं, उड़ीसा एवं तमिलनाडु के अनोखे हस्तशिल्प, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और कश्मीर के आकर्षक परिधान और शिल्प, सिक्किम की थंका चित्रकला, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और शो पीस, दक्षिण भारत के रोजवुड और चंदन की लकड़ी के हस्तशिल्प भी यहां प्रदर्शित हैं। यहां अनेक राज्यों के खास व्यंजनों के साथ ही विदेशी खानपान का स्वाद भी मिलता है। मेला परिसर में चौपाल और नाट्यशाला नामक खुले मंच पर सारे दिन विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार अपनी अनूठी प्रस्तुतियों से समा बांधते हैं। शाम के समय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। दर्शक भगोरिया डांस, बीन डांस, बिहू, भांगड़ा, चरकुला डांस, कालबेलिया नृत्य, पंथी नृत्य, संबलपुरी नृत्य और सिद्घी गोमा नृत्य आदि का आनंद लेते हैं। विदेशों की सांस्कृतिक मंडलियां भी प्रस्तुति देती हैं।
अगर आप मेले में जाने के शौकीन हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. बता दें, हरियाणा के फरीदाबाद में 31 जनवरी यानी आज से सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला शुरू हो चुका है. यह मेले का 39वां संस्करण है. यह मेला 15 फरवरी तक चलना वाला है. इस मेले का देखने के लिए भारत से तो क्या बल्कि विदेशों से भी टूरिस्ट्स आते हैं. ऐसे में अगर आप भी सूरजकुंड मेले में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो पहले जान लीजिए, आखिर यह मेला लगता क्यों है, इसकी क्या खासियत है और कैसे यहां पहुंचा जा सकता है.
क्यों लगता है सूरजकुंड मेला?
सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला एक ऐसा मेला है, जहां देश- विदेश के बेहतरीन कलाकार, शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं. बता दें, यह एक ऐसी जगह है, जहां पारंपरिक, हस्तशिल्प, लोक संगीत, नृत्य और भारत के अलग- अलग राज्यों के स्वादिष्ट भोजन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. बता दें, सूरजकुंड मेला साल 1987 में पहली बार आयोजित किया गया था.
सूरजकुंड मेला 2026: इस साल की थीम स्टेट
हर साल, सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि और विविधता का जश्न मनाता है. साल 2026 के संस्करण में, उत्तर प्रदेश को थीम राज्य के रूप में चुना गया है, जो जरदोजी कढ़ाई, चिकनकारी, कालीन बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाने जैसी अपनी शिल्पकलाओं के साथ-साथ लखनऊ और वाराणसी के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजनों से लोगों का दिल जीतने के लिए तैयार है.
सूरजकुंड मेला 2026 का वेन्यू
सूरजकुंड मेले का आयोजन हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड क्राफ्ट ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है. बता दें, यह जगह काफी बड़ी है. जहां कारीगर, शिल्पकार, खाने-पीने के स्टॉल, सांस्कृतिक मंडप और प्रदर्शन स्थल एक ही छत के नीचे मौजूद हैं.
सूरजकुंड मेला का टिकट कैसे बुक करें, टिकट की कीमत
मेले की एंट्री टिकट किफायती हैं, जिनकी कीमत उम्र और सप्ताह के दिनों या सप्ताहांत के आधार पर अलग-अलग होती है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फ्री एंट्री है. वहीं कई मामलों में छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एंट्री फीस में छूट दी जाएगी.
- वीकडेज पर: 120 प्रति व्यक्ति
- वीकेंड पर: 180 प्रति व्यक्ति
- स्पेशल डिस्काउंट: वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और छात्रों को एंट्री फीस में छूट दी जाएगी. हालांकि उन्हें अपना वैलिड पहचान पत्र दिखाना होगा.
सूरजकुंड मेले की ऑनलाइन टिकट कहां से खरीदें, टिकट बुक करने का ऐप कौन सा है?
आप टिकट दिल्ली के सभी मेट्रो स्टेशन पर उपलब्ध हैं. आप यहां ऑनलाइन पेमेंट कर टिकल ले सकते हैंं. साथ ही मेट्रो की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आप इन्हें खरीद सकते हैं. टिकट डीएमआरसी मोबाइल ऐप और चुनिंदा मेट्रो काउंटरों पर भी बुक किए जा सकते हैं.
सूरजकुंड मेला 2026 का समय
यह मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी तक सुबह 10:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक चलेगा.
सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचे?
सूरजकुंड मेला दिल्ली से लगभग 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसे में आप दिल्ली से एक दिन में आना- जाना आराम से कर सकते हैं. यहां पहुंचने के लिए हाईवे कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध है. इसी के साथ आप बदरपुर मेट्रो स्टेशन उतरकर कैब के जरिए मेले तक पहुंच सकते हैं.
बता दें, सेंट्रल दिल्ली से यात्रा का समय आमतौर पर 45 मिनट से 1.5 घंटे तक होता है, लेकिन सुबह जल्दी यात्रा करने से भारी ट्रैफिक से बचा जा सकता है.
सूरजकुंड मेला के पास के मेट्रो स्टेशन
सूरजकुंड मेले के सबसे नजदीक का मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन पर स्थित बदरपुर बॉर्डर मेट्रो स्टेशन है. अन्य नजदीकी स्टेशनों में सराय (लगभग 2.13 किमी) और तुगलकाबाद (लगभग 2.43 किमी) शामिल हैं, ये दोनों भी वॉयलेट लाइन पर ही स्थित हैं. इन स्टेशनों से मेले के वेन्यू तक पहुंचने के लिए आप शटल सर्विस और ऑटो ले सकते हैं.
सूरजकुंड मेला बस से या गाड़ी से कैसे पहुंचें?
यदि आप सूरजकुंड मेला सड़क के जरिए पहुंचना चाहते हैं, तो दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य एनसीआर क्षेत्रों से NH-44, बदरपुर सीमा, फरीदाबाद और अन्य प्रमुख सड़कों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. यहां से आप आसानी से पहुंच सकते हैं.
ज्यादा जानकारी के लिए आप हरियाणा टूरिज्म की आधिकारी वेब साइट पर जा सकते हैं. अगर आप दिल्ली से बाहर से आ रहे हैं तो यहां आपको आसपास के होटलों में कमरे की बुकिंंग से जुड़ी जानकारी भी मिल सकती है.
भव्य खबर/ रमण श्रीवास्तव