संजीवनी सिद्ध होगा जनता का संकल्प

वर्तमान में राष्ट्रीय संसाधनों का विवेकपूर्ण और राष्ट्र सेवा का सबसे प्रभावी माध्यम है न्यायसंगत उपयोग ही
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2026-05-16 16:17:03

लेखक :- पुष्कर सिंह धामी ( मुख्यमंत्री, उत्तराखंड )

जब पूरा परिवार एक साथ मिलकर समझदारी से कदम आगे बढ़ाता है, तो घर का बड़े से बड़ा संकट भी घुटने टेक देता है। यह समय घबराने का नहीं, बल्कि हम सबको अपने-अपने स्तर से अपने घरों में छोटे-छोटे सुधार करके पूरे देश को एक संदेश देने का है। हमारे पहाड़ की माटी ने कभी विपरीत परिस्थितियों के आगे झुकना नहीं सिखाया। जैसे हमारी माताएं-बहनें अपने घर के बजट और खर्चों को मुश्किल समय में सूझबूझ से अनुकूल ढाल लेती हैं, ठीक वैसे ही आज हमें प्रधानमंत्री मोदीजी के राष्ट्रप्रथम और सेहत मिशन के आह्वान पर अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे लेकिन प्रभावी परिवर्तन करके राष्ट्र सेवा का उदाहरण बनना है। इसी सोच को व्यवहार में उतारते हुए प्रदेश सरकार ने ने भी मंत्रिमंडल स्तर पर ऊर्जा बचत, ईंधन संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा, वर्क फ्राम होम, ईवी पालिसी, लो-आयल अभियान और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, ताकि शासन और समाज दोनों मिलकर आत्मनिर्भरता का व्यावहारिक माडल प्रस्तुत कर सकें। वर्तमान में संपूर्ण विश्व एक असाधारण भू-राजनीतिक और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। इन विपरीत अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद यदि भारत पर इस वैश्विक संकट का प्रभाव अपेक्षाकृत न्यूनतम रहा है, तो इसका सीधा श्रेय देश के कुशल नेतृत्व और मोदीजी की दूरदर्शी नीतियों को जाता है। उनका मानना है कि भविष्य की वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए हमें अपनी घरेलू चुनौतियों से रणनीतिक रूप से निपटने के लिए अभी से तैयार होना होगा। प्रदेश सरकार उनके राष्ट्र प्रथम के दृष्टिकोण का पूर्ण समर्थन करती है तथा नागरिकों से इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान करती है। जब भी हम सामूहिक इच्छाशक्ति और संकट से उबरने की बात करते हैं, तो मुझे केदारनाथ आपदा के बाद हमारे रुद्रप्रयाग के मंदाकिनी महिला बुनकर संघ का ऐतिहासिक उदाहरण याद आता है। साल 2013 की उस भीषण त्रासदी में जब आजीविका के सारे साधन खत्म हो चुके थे।

और तत्कालीन सरकार बगल झांक रही थी तब भी पहाड़ की उन साहसी महिलाओं ने बिना किसी बड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के सिर्फ सूझबूझ, आपसी सहयोग और आत्मनिर्भरता के संकल्प से हथकरघा उद्यम को अपना हथियार बनाया, उन्होंने आकर्षक ऊनी उत्पादों, ऊनी शाल, स्कार्फ, मफलर का एक मजबूत ब्रांड खड़ा करके अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाकर, आपदा के मलबे से स्वाभिमान का रास्ता निकाला। यहां यह पूरी तरह स्पष्ट किया जाता है कि प्रदेश के मुखिया के रूप में, संसाधनों की बचत और जीवनशैली में बदलाव का यह आग्रह केवल आम जनता से ही नहीं है, बल्कि यह अपील जनता के साथ ही प्रदेश सरकार में मेरे सहयोगी मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा संपूर्ण शासन-प्रशासन से भी है। अतः गांव से लेकर सचिवालय, निदेशालयों से लेकर फील्ड स्तर तक सभी को इन मितव्ययिता के सिद्धांतों को पहले स्वयं पर लागू करना होगा। जब शासन व्यवस्था स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करती है, तभी जनता का विश्वास और सामूहिक संकल्प मजबूत होता है। वर्तमान में राष्ट्रीय संसाधनों का विवेकपूर्ण और न्यायसंगत उपयोग ही राष्ट्र सेवा का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके समानांतर आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने के लिए हरित ऊर्जा एक बेहतर विकल्प है। प्रदेश सरकार सोलर एनर्जी और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में ईवी पालिसी के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने और पीएनजी कनेक्शनों को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में मोदीजी के सेहत मिशन के अंतर्गत देश से रसोई में खाद्य तेल के अनावश्यक उपयोग को नियंत्रित करने का भी आग्रह किया गया है। अतः प्रदेशभर के निजी आवासों, स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कैंटीनों तथा होटल ढाबों में लो-आयल मेन्यू जैसे व्यवहारिक प्रयास समाज को स्वस्थ और आत्मानुशासन दोनों की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। देश की आंतरिक वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ करने के लिए हमें अपनी पारंपरिक निवेश प्राथमिकताओं में भी सुधार करने की आवश्यकता है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में इस निष्क्रिय संपत्ति को उत्पादक पूंजी में बदलना समय की आवश्यकता है। इसके लिए सावरेन गोल्ड बांड स्कीम और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम जैसे विकल्प न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि देश की आर्थिक संरचना को भी मजबूत बनाएंगे। हालांकि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी देश ने कई विषम आर्थिक और नीतिगत चुनौतियों का सामना किया है, परंतु तत्कालीन व्यवस्थाओं में नीतिगत स्पष्टता और संकट से उबरने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता का निरंतर अभाव देखा गया। हमारा इतिहास गवाह है कि वर्ष 1975 के आपातकाल जैसे दौर में नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को जिस प्रकार सीमित किया गया, उसे देश आज तक नहीं भुला पाया है। वर्तमान परिस्थितियों की गंभीरता को समझते हुए इन सभी आर्थिक और व्यावहारिक सुधारों को अपनाना हम सभी का नागरिक कर्तव्य है। पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों को निभाएं। बिजली और पानी की बचत को आदत बनाएं तथा राष्ट्रीय संसाधनों के हर अनावश्यक अपव्यय को रोककर देश को मजबूत करें। आशा है कि उत्तराखंड की देवतुल्य जनता के सहयोग से, हमारे ये संयुक्त, अनुशासित और आत्मनियंत्रित प्रयास वैश्विक संकटों का सामना करते हुए राष्ट्र की प्रगति को अक्षुण्ण रखेंगे और प्रधानमंत्री मोदीजी के विकसित भारत @2047 के आकांक्षी किजन को साकार करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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