2026-09-17 09:34:50
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कुछ ऐसी शख्सियतें उभरती हैं, जो नीति, नियति और राष्ट्र की दिशा को बदलने का सामर्थ्य रखती हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे ही युगद्रष्टा राजनेता हैं, जिनका जीवन संघर्ष, सेवा और अटूट संकल्प की एक जीवंत महागाथा है। गुजरात के एक बेहद साधारण और पिछड़े पृष्ठभूमि वाले कस्बे वडनगर से निकलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधान सेवक बनने तक की उनकी यात्रा, आधुनिक भारत के पुनरुत्थान की कहानी है। यह सफर केवल एक राजनेता का उत्कर्ष नहीं है, बल्कि यह देश के हर उस आम नागरिक के सपनों और आकांक्षाओं की जीत है जो अभावों से लड़कर शिखर छूने का हौसला रखता है।
नरेंद्र मोदी का शुरुआती जीवन कड़े संघर्षों और अनुशासन के बीच बीता। रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में पिता का हाथ बंटाने से लेकर जीवन के बुनियादी अनुभवों को आत्मसात करने तक, उनके बचपन ने उन्हें समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के दर्द को महसूस करना सिखाया। युवावस्था में ही उन्होंने गृहत्याग कर दिया और सत्य व ज्ञान की खोज में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर हिमालय की कंदराओं में भ्रमण किया। इस आध्यात्मिक यात्रा ने उनके भीतर राष्ट्र के प्रति एक निस्वार्थ समर्पण भाव को जगाया, जिसने आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कर्मठ प्रचारक के रूप में स्थापित किया। संघ के दिनों में देश भर में किया गया व्यापक भ्रमण ही वह नींव थी, जिसने उन्हें भारत की जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय विविधताओं और जनता की बुनियादी जरूरतों से सीधे रूबरू कराया।
शुरुआती राजनीतिक सफर: सांगठनिक क्षमता का लोहा
अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में नरेंद्र मोदी ने मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया, जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1990 के दशक में उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी अद्वितीय सांगठनिक क्षमता और चुनावी रणनीतिकार के रूप में लोहा मनवाया। 1991 की ऐतिहासिक एकता यात्रा के प्रबंधन से लेकर गुजरात और अन्य राज्यों में भाजपा को मजबूत आधार देने में उनकी पर्दे के पीछे की भूमिका ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल एक कुशल वक्ता हैं, बल्कि एक सूक्ष्म रणनीतिकार भी हैं। संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने की जो अनूठी कार्यशैली विकसित की, वही आगे चलकर उनकी राजनीतिक सफलताओं का मुख्य आधार बनी।
गुजरात के मुख्यमंत्री का कार्यकाल: सुशासन और विकास का गुजरात मॉडल
अक्टूबर 2001 में नरेंद्र मोदी के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ आया, जब उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक कमान सौंपी गई। एक भीषण भूकंप की विभीषिका से कराह रहे राज्य को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने आपदा को एक बड़े अवसर में बदल दिया। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को प्रशासनिक सुधारों, त्वरित निर्णयों और अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जाना जाता है। उन्होंने नौकरशाही को जवाबदेह बनाया और वाइब्रेंट गुजरात समिट के जरिए राज्य को वैश्विक निवेश के सबसे पसंदीदा ठिकाने के रूप में स्थापित किया।
उनके नेतृत्व में गुजरात ने कृषि, उद्योग और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए। ज्योतिग्राम योजना के माध्यम से राज्य के हर गांव तक 24 घंटे निर्बाध बिजली पहुंचाना हो, या सुजलाम सुफलाम और नर्मदा नहर परियोजना के जरिए सूखे इलाकों तक पानी पहुंचाना, उनके इन अभिनव प्रयोगों ने विकास का एक ऐसा गुजरात मॉडल पेश किया, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी। वे लगातार चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और उनका यह सुशासन ही देश की राजनीति में एक नए विकल्प की उम्मीद बना।
भारत के प्रधानमंत्री का कार्यकाल: साहसिक फैसले और युगांतकारी सुधार
साल 2014 के आम चुनाव में देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल और उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताते हुए उन्हें प्रचंड बहुमत से देश का प्रधानमंत्री चुना। सबका साथ, सबका विकास के मूल मंत्र के साथ उन्होंने देश की सत्ता संभाली। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को कड़े, ऐतिहासिक और साहसिक फैसलों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके नेतृत्व में सरकार ने दशकों से लंबित राष्ट्रीय मुद्दों का समाधान करने का साहस दिखाया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए की समाप्ति, तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण उनके दृढ़ राजनीतिक संकल्प का साक्षात प्रमाण हैं।
आर्थिक और ढांचागत क्षेत्र में, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करके एक देश, एक टैक्स के सपने को साकार किया गया। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत (विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना) जैसी पहलों ने देश के करोड़ों वंचितों के जीवन को गरिमा, सुरक्षा और अधिकार दिए। डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में एक ऐसी डिजिटल क्रांति को जन्म दिया, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा डिजिटल लेन-देन करने वाला देश बन चुका है। वहीं मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के जरिए रक्षा उत्पादन से लेकर मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक भारत आज आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग और रक्षा क्षेत्र में आईएनएस विक्रांत का बेड़े में शामिल होना बदलते भारत की शक्तिशाली तस्वीर पेश करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की विशेष योजनाएं
साल 2014 के आम चुनाव में देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल पर अटूट विश्वास जताते हुए उन्हें प्रचंड बहुमत से देश का प्रधानमंत्री चुना। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र के साथ उन्होंने देश की सत्ता संभाली। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने सरकारी योजनाओं को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठाकर अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति (अंत्योदय) के सशक्तीकरण का माध्यम बनाया।
उनकी सरकार ने देश की बुनियादी और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए कई युगांतकारी योजनाओं की शुरुआत की:
वित्तीय समावेशन की क्रांति (जनधन योजना): बैंकिंग सिस्टम से दूर रहे करोड़ों गरीबों के लिए 50 करोड़ से अधिक प्रधानमंत्री जन धन खाते खोले गए। इसने न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई, बल्कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सरकारी मदद सीधे गरीबों के बैंक खातों में पहुंचाना सुनिश्चित किया।
गरीबों को स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच (आयुष्मान भारत): यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना बनी, जिसके तहत देश के 55 करोड़ से अधिक जरूरतमंद लोगों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इसने गरीब परिवारों को इलाज के खर्च के कारण कर्ज के जाल में फंसने से बचाया।
धुआं मुक्त भारत और नारी गरिमा (उज्ज्वला योजना): ग्रामीण महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए 10 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी (LPG) कनेक्शन बांटे गए। इसके साथ ही, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कराकर देश की नारी शक्ति को सुरक्षा और गरिमा प्रदान की गई।
हर सिर पर छत और हर घर जल (आवास व जल जीवन मिशन): प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण कर गरीबों का अपने घर का सपना सच किया गया। वहीं जल जीवन मिशन के तहत देश के 14 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों तक पाइप से साफ पीने का पानी पहुंचाया जा चुका है।
सुरक्षित कल और मुफ्त राशन (अन्न योजना व किसान सम्मान): प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन की गारंटी दी गई, जिसने भुखमरी की समस्या को जड़ से समाप्त किया। इसके साथ ही पीएम-किसान सम्मान निधि के जरिए देश के करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में सीधे नकद सहायता भेजी जा रही है।
वैश्विक पटल पर भारत का अभूतपूर्व उत्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में एक नया आत्मविश्वास और आक्रामकता देखी गई है। आज भारत सिर्फ अपनी सीमाओं के भीतर ही नहीं बदल रहा, बल्कि वैश्विक पटल पर भी देश की साख अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुई है। योग को वैश्विक मान्यता दिलाने से लेकर जी-20 की अत्यंत सफल अध्यक्षता और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने तक, आज भारत दुनिया के एजेंडे को प्रभावित करने वाले विश्वमित्र के रूप में स्थापित हो चुका है। संकट के समय दुनिया के देशों की मदद करने की नीति ने भारत की छवि को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभारा है।
लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक जनादेश पाकर देश की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्र प्रथम की भावना, कड़ा अनुशासन और अथक परिश्रम से किसी भी चुनौती को परास्त किया जा सकता है। आज जब देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विराट संकल्प के साथ अमृत काल की यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, तब एक चाय बेचने वाले से लेकर वैश्विक महानायक बनने की यह गाथा भारतीय लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत और जीवंत मिसाल है।
आत्मनिर्भरता और 2047 का संकल्प
कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को कड़े और ऐतिहासिक फैसलों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति, तीन तलाक का अंत और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण उनके दृढ़ राजनीतिक संकल्प का साक्षात प्रमाण हैं। आर्थिक क्षेत्र में, वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू करके एक देश, एक टैक्स के सपने को साकार किया गया। डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में एक ऐसी डिजिटल क्रांति को जन्म दिया, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा डिजिटल लेन-देन करने वाला देश बन चुका है।मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के जरिए रक्षा उत्पादन से लेकर मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक भारत आज आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग और रक्षा क्षेत्र में आईएनएस विक्रांत का बेड़े में शामिल होना बदलते भारत की शक्तिशाली तस्वीर पेश करता है। वैश्विक पटल पर भी, योग को वैश्विक मान्यता दिलाने से लेकर जी-20 की अत्यंत सफल अध्यक्षता और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने तक, आज भारत दुनिया के एजेंडे को प्रभावित करने वाले विश्वमित्र के रूप में स्थापित हो चुका है।लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक जनादेश पाकर देश की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्र प्रथम की भावना, कड़ा अनुशासन और अथक परिश्रम से किसी भी चुनौती को परास्त किया जा सकता है। आज जब देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विराट संकल्प के साथ अमृत काल की यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, तब एक चाय बेचने वाले से लेकर वैश्विक महानायक बनने की यह गाथा भारतीय लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत और जीवंत मिसाल है।
रमण श्रीवास्तव
संपादक : भव्य खबर