प्रधानमंत्री के संबोधन पर सियासी विवाद तेज, केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस

विपक्षी सांसदों पर टिप्पणी को बताया संसद की गरिमा पर चोट, सरकार के संविधान संशोधन विधेयक की हार के बाद बढ़ा टकराव
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2026-04-21 16:35:16

नई दिल्लीभव्य खबर । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के सी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस दिया है।

वेणुगोपाल ने अपने पत्र में कहा कि 18 अप्रैल 2026 को प्रसारित प्रधानमंत्री के संबोधन में लोकसभा सदस्यों के खिलाफ “आक्षेप” लगाए गए, जो संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं के विपरीत हैं। उन्होंने लोकसभा के नियम 222 के तहत यह नोटिस दाखिल करते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पत्र में उन्होंने 17 अप्रैल को लोकसभा में सरकार के Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 के गिरने का जिक्र किया। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों की भूमिका की आलोचना की और उनके मतदान व्यवहार पर सवाल उठाए।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने 29 मिनट के संबोधन में विपक्ष के इरादों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “एक निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर सवाल उठाना केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि संसद की अधिकारिता और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।”

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि इस मामले में तुरंत और ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि संसद की गरिमा और सदस्यों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर राष्ट्रीय एकता और विश्वास कायम करने के लिए होता है, लेकिन इस बार यह पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ नजर आया। उन्होंने दावा किया कि संबोधन के दौरान कांग्रेस पार्टी पर 50 से अधिक बार निशाना साधा गया, जो प्रधानमंत्री के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

गौरतलब है कि सरकार का यह संविधान संशोधन विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने से जुड़ा था। लोकसभा में इसके पारित न हो पाने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है।

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